JKBOSE 10th Class Hindi Solutions chapter – 3 पत्राचार अथवा पत्र-लेखन
JKBOSE 10th Class Hindi Solutions chapter – 3 पत्राचार अथवा पत्र-लेखन
Jammu & Kashmir State Board JKBOSE 10th Class Hindi Solutions
आधुनिक जीवन में पत्र लेखन एक महत्त्वपूर्ण कला बन गई है। अपनी भावनाओं एवं विचारों को दूसरों तक पहुंचाने का तथा प्राप्त करने का पत्र एक श्रेष्ठ साधन है। “पत्र हमारे हृदय के विभिन्न पटलों को खोलने में सहायक होते हैं। ये हमारी भावनाओं एवं विचारों की पंखुड़ियों से निर्मित सुन्दर पुष्प हैं।”
व्यक्तिगत पत्रों का अत्यधिक महत्त्व है। ये दूरस्थ व्यक्तियों की भावना को एक संग भूमि पर लाने का सरलतम साधन हैं। पारिवारिक तथा सामाजिक सम्बन्धों को बनाए रखने के लिए पत्र एक सेतु का कार्य करते हैं।
प्राचीनकाल में भी पत्रों का बड़ा महत्त्व था । यातायात के साधनों के अभाव के कारण उस समय संदेश ले जाने तथा ले आने का कार्य हंस तथा कबूतर आदि पक्षी करते थे। वैज्ञानिक युग में रेल, टेलीफोन तथा तार आदि ने पत्रों के महत्त्व को विशेष बढ़ावा दिया है।
पत्रों में कलात्मकता का गुण होना चाहिए। इसी कारण पत्र1- लेखन को एक-कला की संज्ञा दी गई है। पत्र के द्वारा पत्रलेखक के व्यक्तित्व का भी उद्घाटन हो जाता है। महान् व्यक्तियों तथा साहित्यकारों द्वारा लिखे गए पत्र एक अमूल्य निधि बन जाते हैं।
अच्छे पत्र के गुण – एक अच्छे पत्रों में निम्नलिखित विशेषताएं होनी चाहिएं-
- भाषा-शैली में सरलता – पत्र लेखक को अपनी विद्वत्ता की धाक् जमाने का प्रयत्न नहीं करना चाहिए। पत्र का पाठक सामान्य स्तर का भी हो सकता है। अतः पत्र की भाषा सरल एवं बोलचाल के निकट हो, शैली में रोचकता का गुण हो ।
- विचारों में सुस्पष्टता – पत्र में वर्णित विचार पूरी तरह स्पष्ट हों । किसी भी बात को घुमा फिरा कर लिखना पत्र की रोचकता को समाप्त कर देता है। कोई भी बात कौतूहल उत्पन्न करने वाली न हो ।
- संक्षेप – पत्र में प्रत्येक भाव एवं विचार को संक्षेप में लिखना चाहिए । व्यर्थ की भूमिका नहीं देनी चाहिए। कई पाठक तो लम्बे पत्र को एक ओर फेंक देते हैं। पत्र में केवल उन्हीं बातों का वर्णन हो जो आवश्यक है। यदि किसी पत्र का उत्तर लिखना हो तो प्रत्येक बात को एक क्रम से स्पष्ट करते हुए लिखना चाहिए। कोई भी आवश्यक बात छूटने न पाए। पत्र एक पूर्ण चित्र के समान हो ।
- प्रभाव की एकता – पत्र में पाठक को प्रभावित करने का भी गुण होना चाहिए। पाठक को ऐसा प्रतीत हो जैसे वह एक श्रोता के समान किसी पात्र के संवाद सुन रहा है जिसमें तन्मयता का गुण है और जिस पर टीका-टिप्पणी करने की कोई गुंजायश नहीं।
उक्त गुणों के अतिरिक्त पत्र की लिखावट सुन्दर हो । विराम चिह्नों का प्रयोग यथा स्थान होना चाहिए। पत्र को एक ही पैरे में न लिखकर दो-तीन पैरों में लिखना चाहिए। पत्र के आरम्भ और अन्त दोनों की ओर विशेष ध्यान देना चाहिए।
पत्रों का वर्गीकरण
पत्रों के क्षेत्र अत्यन्त व्यापक हैं। ये स्थूल रूप से तीन प्रकार के होते हैं-
1. सामाजिक पत्र
2. व्यापारिक पत्र
3. सरकारी पत्र
व्यापारिक एवं सरकारी क्षेत्रों में औपचारिकता रहती है ।
सामाजिक पत्र – हमारे जीवन का अभिन्न अंग है। सामाजिक पत्रों के विविध रूप हैं-
(क) सम्बन्धियों के पत्र
(ख) मित्रों के पत्र
पत्रों के विषय परिस्थिति और समय के अनुसार भिन्न-भिन्न होते हैं यथा-
(क) बधाई-पत्र
(ख) शोक-पत्र
(ग) निमन्त्रण-पत्र आदि
पारिवारिक एवं सामाजिक सम्बन्धों के अनुसार पत्र प्रायः चार प्रकार के होते हैं-
1. छोटे बड़ों को लिखते हैं।
2. बड़े छोटों को लिखते हैं।
3. बराबर वाले बराबर वालों को लिखते हैं।
4. व्यावहारिक पत्र –
इन पत्रों का सम्बन्ध व्यवहार सम्बन्धी आवश्यकता से है। ऐसे पत्रों में किसी प्रकार के अपनत्व को प्रकट करने तथा हार्दिक अनुभूतियों को व्यक्त करने का अवसर नहीं होता। हिन्दी के पत्र अंग्रेज़ी के पत्रों से भिन्न होते हैं। अंग्रेज़ी- पत्रों में प्रायः सब (छोटे-बड़े) के लिए आरम्भ में My Dear का प्रयोग होता है लेकिन हिन्दी के पत्रों में अभिवादन सम्बन्धों के अनुसार भिन्न-भिन्न होता है।
पत्र के अंग
(i) पत्र प्रेषक का नाम एवं पता (दाहिनी ओर)
(ii) दिनांक
(iii) सम्बोधन
(iv) अभिवादन
(v) विषय
(vi) अभिनिवेदन
यथा
(i) स्थान अथवा पता आदि (ii) तिथि…………… (iii) सम्बोधन……. (iv) अभिवादन… (v) विषय…….. …….. …….. …….. …….. …….. (vi) अभिनिवेदन |
पुत्र द्वारा पिता को पत्र
केन्द्रीय विद्यालय,
जम्मू ।
16 जुलाई, 20….
श्रद्धेय पिता जी,
सादर प्रणाम ।
आपका कृपा पत्र मिला………….
…….. …….. …….. …….. ……..
आपका आज्ञाकारी,
विवेक कपूर |
परीक्षा में पत्र लिखते समय पत्र के दाहिनी ओर केवल परीक्षा भवन तथा दिनांक लिखें। पत्र के अन्त में नाम अथवा रोल नम्बर आदि न लिख कर क ख ग आदि लिख दें।
उदाहरण के लिए मित्र को पत्र
परीक्षा भवन, 11 मार्च, 20…. प्रिय मित्र, सस्नेह नमस्कार । आपका पत्र मिला………………………………………………………………………………… ……………………………………………………………………………………………………. आपका, क ख ग |
सम्बन्ध के अनुसार पत्रों में सम्बोधन, अभिवादन और अन्त में अभिनिवेदन –
(i) अपने से बड़ों को
सम्बन्ध – माता, पिता, गुरु, बड़ा भाई, चाचा, मामा आदि ।
आरम्भ – पूज्य, आदरणीय, पूजनीय, श्रद्धेय, परम आदरणीय आदि ।
अभिवादन – सादर प्रणाम, सादर नमस्कार आदि ।
अभिनिवेदन ( समाप्ति पर ) – आपका आज्ञाकारी, आपका कृपापात्र, कृपाभिलाषी, आप का सेवक ।
(ii) अपने से छोटों को
आरम्भ – प्रिय अनुज, प्रियवर आदि ।
अभिवादन – शुभाशीष, चिरंजीव रहो, प्रसन्न रहो आदि।
अभिनिवेदन – तुम्हारा हितैषी, तुम्हारा शुभ चिन्तक, शुभाकांक्षी ।
(iii) बराबर वालों को पत्र अथवा मित्रों को पत्र
आरम्भ – प्रिय जगजीत, प्रिय मित्र आदि
अभिवादन – सस्नेह नमस्कार, जयहिन्द –
अभिनिवेदन – आपका अभिन्न हृदय, आपका अपना
(iv) व्यावहारिक पत्र
आरम्भ – प्रिय महोदय, प्रिय महाशय, श्रीमान् जी
सम्बोधन – कोई आवश्यकता नहीं
अभिनिवेदन – भवदीय; निवेदक आदि ।
1. जन्म दिवस पर प्राप्त भेंट के लिए धन्यवाद – पत्र लिखें ।
712, जनता नगर
ऊधमपुर ।
23 दिसम्बर, 20……
पूज्य चाचा जी,
सादर प्रणाम।
आपने मेरे जन्म दिवस पर मुझे अपनी शुभ कामनाओं के साथ-साथ जो घड़ी भेजी है, उसके लिए मैं आपका हार्दिक धन्यवाद करता हूं। मेरी पहली घड़ी पुरानी हो जाने के कारण न तो ठीक तरह से चलती थी और न ही ठीक समय की सूचना देती थी। अतः मैं नई घड़ी की आवश्यकता का अनुभव भी कर रहा था। घड़ी देखने में भी अत्यन्त आकर्षक है। ठीक समय देने में तो इसका जवाब नहीं ।
चाचा जी, मुझे तोहफे तो और भी मिले हैं पर आपकी घड़ी की बराबरी कोई नहीं कर सकता। आपकी यह प्रिय भेंट चिरस्मरणीय है।
इस भेंट के लिए मैं एक बार फिर आपका धन्यवाद करता हूं।
चाची जी को सादर प्रणाम। विमल और कमल को मेरी ओर से सस्नेह नमस्कार ।
आपका आज्ञाकारी,
विशाल मल्होत्रा ।
2. अपने छोटे भाई को एक पत्र लिखते हुए उसे कुसंगति से बचने की चेतावनी दीजिए।
209 माडल टाऊन,
जम्मू।
11 अगस्त, 20…..
प्रिय अनुज,
चिरंजीव रहो ।
लगभग दो मास तुम्हारी ओर से कोई पत्र न आने का कारण आज मालूम हुआ। मैं सोच रहा था कि शायद तुम अपने अध्ययन में मग्न होंगे। लेकिन इस भ्रांति का परदा हट गया है। तुम्हारे अध्यापक महोदय ने सारी स्थिति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने अपने प्रथम पत्र में लिखा था कि अगर गौतम इसी तरह अध्ययन में लीन रहा तो निश्चय ही वह अपने स्कूल का नाम रोशन करेगा। आज उन्हीं को यह लिखना पड़ा है कि अगर गौतम इसी रास्ते पर चलता रहा तो खेद से कहना पड़ता है कि शायद वह परीक्षा में उत्तीर्ण भी न हो सके। कारण स्पष्ट करते हुए उन्होंने लिखा है कि तुम्हारी संगति अच्छी नहीं । तुम्हारा उठना-बैठना स्कूल के ऐसे छात्रों के साथ है जिनका लक्ष्य समय और मां-बाप की कमाई को नष्ट करना है। ।
प्रिय गौतम ! मैं अपने प्रत्येक पत्र में तुम से यही अनुरोध करता हूं कि कुसंगति से बच कर रहना । तुम्हें केवल चलचित्र देखने का ही व्यसन नहीं पड़ा बल्कि तुम धूम्रपान जैसी बुरी आदत का भी शिकार बन गए हो, जानते हो, पिता जी ने क्या-क्या उम्मीदें लगा रखी हैं। वे कहा करते हैं – ” सुपुत्र और सुगंधित वृक्ष की एक ही दशा होती है। जिस प्रकार सुगंधित वृक्ष अपनी गंध से सारे वन को सुवासित कर देता है उसी प्रकार सुपुत्र अपने शुभ कर्मों के फूलों की सुगंधि से सारे कुल को सुवासित बना देता है।” यदि उन्हें तुम्हारे आचरण का पता लग गया तो उन्हें कितना दुःख होगा ।
बुरी संगति के प्रभाव का परिणाम बड़ा भयंकर होता है। मनुष्य कहीं का नहीं रहता। वह न परिवार का कल्याण कर सकता है और न देश और जाति के प्रति अपने कर्त्तव्य का निर्वाह कर सकता है। कुसंग नाशकारी है तो सुसंग कल्याणकारी । सुर, तुलसी, कबीर आदि संत कवियों ने भी कुसंग से बचने की प्रेरणा दी है। प्रिय अनुज ! अब भी कुछ नहीं बिगड़ा। बुरी आदतों का परित्याग करो और अपने आपको अध्ययन में केन्द्रित करो। अपने कर्त्तव्य को समझो और सदैव सत्संगति का ही आश्रय लो । आशा है कि मेरे कथन का तुम्हारे ऊपर प्रभाव पड़ेगा। परिश्रम के बल पर पिछली कमी को पूरा करो। मुझे विश्वास है कि तुम अपने खोए हुए स्थान को पुनः प्राप्त करोगे और पिता जी का सपना साकार कर दिखाओगे। घर पर सभी तुम्हें याद करते हैं। कुछ परीक्षोपयोगी पुस्तकें भी भेज रहा हूं। अपनी कुशलता का समाचार लिखते रहना ।
तुम्हारा शुभ चिन्तक
सुरेश ।
3. आपकी छोटी बहन परीक्षा में असफल हो गई है। उसे सांत्वना देने के लिए पत्र लिखिए।
अथवा
परीक्षा में असफल रहने वाले अपने मित्र अथवा अपनी सखी को सांत्वना पत्र लिखिए।
207 शास्त्री नगर,
अखनूर ।
7 अक्तूबर, 20…..
प्रिय अनुराधा,
शुभाशीष ।
आज ही माता जी का पत्र प्राप्त हुआ। यह जानकर दुःख हुआ कि तुम दशम् की परीक्षा में असफल रहीं हो। यह सब समय के अभाव के कारण हुआ है। इसमें तुम्हारा कोई दोष नहीं। माता जी की लम्बी बीमारी के कारण तुम्हें घर का सारा काम-काज भी करना पड़ता था। हमें इस बात में संतोष है कि तुम्हारी सेवा से ही वे अब स्वस्थ हो गई हैं। प्रिय बहिन, इसमें निराश होने की बात नहीं, तुमने अपने परीक्षा-पत्रों के विषय में पहले ही संकेत दे दिया था।
जो हो चुका है, उस पर खेद प्रकट करना व्यर्थ है। धैर्य का महामन्त्र है ‘निरन्तर प्रयत्न’। अगले वर्ष की परीक्षा के लिए अभी से तैयारी शुरू कर दो । सामान्य सफलता की अपेक्षा शानदार सफलता प्राप्त करना कहीं अच्छा है। यह याद रखो “दृढ़ संकल्प, निरन्तर प्रयत्न और साहस द्वारा सफलता अवश्य प्राप्त होती है। विफलता एक संकेत है पुनः तैयार होने का । “
भविष्य उसी का है जिस में धैर्य का बल है ।
अपने हृदय में व्याप्त निराशा एवं उदासी का भाव दूर करो और पूर्ण आशा के साथ अध्ययन में जुट जाओ। मैंने तुम्हारे लिए कुछ परीक्षोपयोगी पुस्तकें भी मंगवाई हैं। प्राप्त होने पर शीघ्र ही भेज दूंगा ।
माता जी को सादर प्रणाम । अंशु और रेणु को बहुत बहुत प्यार |
तुम्हारा भाई,
मयंक ।
4. अपने छोटे भाई को एक पत्र लिखो जिसमें उसे व्यायाम का महत्त्व बताया गया हो ।
अथवा
अपने छोटे भाई को पत्र लिख कर उसे स्वस्थ रहने के उपाय बताएं।
322, संगम रोड,
श्रीनगर ।
27 फरवरी, 20…..
प्रिय अनुज,
चिरंजीव रहो ।
माता जी ने अपने पत्र में लिखा है कि तुम्हारा स्वास्थ्य निरन्तर गिर रहा है। इससे मुझे बड़ी चिन्ता हुई है। प्रिय अनुज ! स्वास्थ्य ही मनुष्य की सबसे बड़ी सम्पत्ति है। इसके अभाव में जीवन का कोई भी कार्य सफल नहीं हो सकता। खाने-पीने का आनन्द भी स्वस्थ व्यक्ति ही ले सकता है। यह ठीक है कि तुम्हारा अध्ययन पूर्ववत् चल रहा है पर शीघ्र ही इस गिरते हुए स्वास्थ्य का प्रभाव तुम्हारे अध्ययन पर भी पड़ेगा। मन एवं मस्तिष्क को बलवान् बनाने में भी स्वास्थ्य का बड़ा योगदान रहता है।
दुर्बलता एक प्रकार का अभिशाप है। शरीर को स्वस्थ एवं शक्ति-सम्पन्न बनाने के लिए व्यायाम की अत्यन्त आवश्यकता है। शरीर की दुर्बलता को दूर करने के लिए व्यायाम एक औषधि है। व्यायाम से शरीर सुन्दर तथा सहनशील बनता है। शरीर में स्वच्छ रक्त का संचार होता है तथा पाचन शक्ति बढ़ती है। अतः तुम नियमित रूप से व्यायाम करो। प्रातः भ्रमण की आदत डालो और किसी खुले स्थान पर वाटिका में जा कर व्यायाम करो। इससे शरीर में स्फूर्ति भी बढ़ेगी और कार्य करने की शक्ति भी।
आशा है कि तुम अपने स्वास्थ्य की उपेक्षा नहीं करोगे और व्यायाम के अभ्यास द्वारा अपने शरीर को पुष्ट बनाओगे।
माता जी को प्रणाम।
तुम्हारा हितैषी,
रवीन्द्र वर्मा ।
5. छोटे भाई को पत्र लिखो और उसे समय का महत्त्व बताओ।
16 रूप नगर,
अवन्तिपुर ।
25 मई, 20…..
प्रिय अनुज,
चिरंजीव रहो !
कल ही पिता जी का पत्र प्राप्त हुआ है। उसमें उन्होंने तुम्हारे विषय में यह शिकायत की है कि तुम समय के महत्त्व को नहीं समझते। अपना अधिकांश समय खेल-कूद में तथा मित्रों से व्यर्थ के वार्तालाप में नष्ट कर देते हो। नरेश ! तुम्हारे लिए यह उचित नहीं। समय ईश्वर का दिया हुआ अमूल्य धन है। इसका ठीक ढंग से व्यय करना हमारा परम कर्त्तव्य है। समय की उपेक्षा करने वाला कभी महान् नहीं बन सकता ।
शीघ्र ही तुम्हारा कालेज ग्रीष्मावकाश के लिए बन्द हो रहा है। तुमने अपने भ्रमण के लिए जो योजना बनाई है, वह ठीक है। कुछ दिन शिमला में रहने से तुम्हारा मन तथा शरीर दोनों स्वस्थ बन जाएंगे। वहां भी तुम अध्ययन का क्रम जारी रखना। ज्ञान की वृद्धि के लिए पाठ्यक्रम के अतिरिक्त भी कुछ उपयोगी पुस्तकों का अध्ययन करना चाहिए लेकिन दृष्टि परीक्षा पर ही केन्द्रित रहे ।
प्रत्येक क्षण का सदुपयोग एक पीढ़ी के समान है जो हमें निरन्तर उत्थान तथा प्रगति की ओर ले जाता है। संसार इस बात का साक्षी है कि जितने भी महान् व्यक्ति हुए हैं, उन्होंने अपने जीवन के किसी भी क्षण को व्यर्थ नहीं जाने दिया। इसीलिए वे आज इतिहास के पृष्ठों में अमर हो गए हैं, पंत जी ने भी अपने जीवन को सुन्दर रूप में देखने के लिए भगवान् से कामना करते हुए कहा है-
यह पल-पल का लघु जीवन,
सुन्दर, सुखकर शुचितर हो ।
प्रिय अनुज ! याद रखो । समय संसार का सब से बड़ा शासक है। बड़े-बड़े नक्षत्र भी उसके संकेत पर चलते हैं। हमारी सफलता-असफलता समय के सदुपयोग अथवा दुरुपयोग पर ही निर्भर करती है। समय का मूल्य समझना, जीवन का मूल्य समझना है। हमारे देश में ऐसे लोगों की कमी नहीं जो समय के दुरुपयोग में ही जीवन का आनन्द ढूंढ़ते हैं। ऐसे लोग प्रायः व्यर्थ की बातचीत में, ताश खेलने में, चलचित्र देखने में तथा आलस्यमय जीवन व्यतीत करने में ही अपना समय नष्ट करते रहते हैं। हमारे जीवन में मनोरंजन का भी महत्त्व है पर मेहनत का पसीना बहाने के बाद। मनोरंजन के नाम पर समय नष्ट करना भूल ही नहीं बल्कि बहुत बड़ी मूर्खता है। इस प्रकार समय के सदुपयोग में ही जीवन की सार्थकता है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि तुम समय का मूल्य समझोगे और उसके सदुपयोग द्वारा अपने जीवन को सफल बनाओगे।
मेरी ओर से माता-पिता को प्रणाम ।
तुम्हारा हितैषी,
रविन्द्र वर्मा |
6. किसी समाचार पत्र के सम्पादक को पत्र लिखिए, जिसमें नगर में व्याप्त बिजली की अव्यवस्था का वर्णन किया गया हो।
जयदेव खन्ना,
5/12 रघुनाथ बाजार
जम्मू ।
दिनांक 7 अगस्त, 20…..
सेवा में
सम्पादक,
हिन्दुस्तान टाइम्स,
नई दिल्ली।
महोदय,
मैं आपके लोकप्रिय दैनिक समाचार पत्र के माध्यम से अपने नगर जम्मू में फैली बिजली की अव्यवस्था की ओर बिजली विभाग के उच्च अधिकारियों का ध्यान आकर्षित कराना चाहता हूँ। पहले नगर की सड़कों को ही लीजिए। एक तो ये सड़कें तंग हैं, दूसरे इन पर यातायात का आवागमन दिन की अपेक्षा रात को अधिक होता है। ट्रकों से सड़कें घिरी रहती हैं। सड़क के दोनों ओर बिजली के खम्भे हैं पर उन पर प्रकाश प्रायः गायब रहता है। परिणामस्वरूप अनेक दुर्घटनाओं की सम्भावना बनी रहती है। ऐसी अवस्था में सड़क पर जाने वाला प्रत्येक व्यक्ति अपने को असुरक्षित समझता है।
बिजली के न होने से अनेक स्थानों पर काम-काज ठप्प हो जाता है। इससे उत्पादन कम होता है, श्रमजीवी का आर्थिक संकट बढ़ता है। बिजली की यह आंख-मिचौनी छात्र-छात्राओं की पढ़ाई में बाधा डालती है। बिजली का अभाव अनेक प्रकार के संकटों को जन्म देता है।
अधिकारी वर्ग हमारी शिकायतों को अपेक्षा की दृष्टि से देखता है। कुछ लोगों ने उनके विरुद्ध प्रदर्शन भी किये हैं, पर उनके कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। आपके समाचार पत्र की बड़ी धाक है। यदि आप हमारा साथ दें तो हम अवश्य ही इस संकट से मुक्त हो सकते हैं। इस पत्र को प्रकाशित करने की कृपा करने के साथ-साथ याद रहे इस विषय पर एक सम्पादकीय लेख भी लिख दें तो हम आपके अत्यन्त आभारी होंगे।
सधन्यवाद
भवदीय,
जयदेव खन्ना,
7. आपका मित्र बोर्ड की परीक्षा में प्रथम रहा है उसे बधाई सम्बन्धी एक पत्र लिखिए।
31, सुभाष नगर,
गुलमर्ग |
7 अगस्त, 20…..
प्रिय मित्र गिरीश,
सस्नेह नमस्कार ।
आज के दैनिक ‘ट्रिब्यून’ में तुम्हारा चित्र देखकर तथा यह जान कर कि तुम बोर्ड की परीक्षा में देश भर में प्रथम रहे हो, हृदय प्रसन्नता से झूम उठा । मित्रवर, तुम से यही आशा थी । तुमने अपने माता-पिता तथा प्राध्यापक वर्ग के सपनों को साकार कर दिया है। मित्र वर्ग की प्रसन्नता का तो पारावार ही नहीं। इस शानदार सफलता पर मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार करें। यह तुम्हारे कठोर परिश्रम का सुपरिणाम है। आज तुमने अनुभव किया होगा कि परिश्रम और प्रयत्न की कितनी महिमा है।
आज तुम्हारे ऊपर सभी गर्व का अनुभव कर रहे हैं। तुम्हारे माता-पिता कितने प्रसन्न होंगे, इसका अनुमान लगाना सहज नहीं। तुम्हारी इस असामान्य सफलता ने विद्यालय को ही चार चाँद लगा दिए हैं। आशा है कि आगामी परीक्षा में भी तुम इसी तरह अपूर्व सफलता प्राप्त करते रहोगे। सम्भव है अगले सप्ताह तुम्हारे पास आऊं। मिठाई तैयार रखना। अगर ठहर सका तो चलचित्र भी अवश्य देखूंगा। इस शानदार सफलता पर एक बार फिर मेरी ओर से हार्दिक बधाई स्वीकार करें। अपने माता-पिता को मेरी ओर से हार्दिक बधाई देने के साथ मेरी ओर से सादर नमस्कार भी कहें।
तुम्हारा अभिन्न मित्र,
राजीव बंसल ।
8. अपने मित्र अथवा सखी को एक पत्र लिखो जिसमें उसे अपने जीवन-लक्ष्य पर प्रकाश डाला गया हो।
अथवा
अपने जीवन का उद्देश्य बताते हुए अपने पिता जी को एक पत्र लिखिए।
110, गांधी मार्ग,
जम्मू।
14 अगस्त, 20…..
प्रिय सखी रमा,
सस्नेह नमस्कार,
आपने अपने पत्र में ‘जीवन में लक्ष्य के महत्त्व’ पर बड़े सुन्दर विचार व्यक्त किए हैं। ‘प्रयोजन के बिना मूर्ख व्यक्ति भी कार्य नहीं करता ।’ यह कथन बड़ा सारगर्भित है। आपने मुझे अपने जीवन-लक्ष्य के विषय में भी लिखने के लिए कहा है। प्रिय बहिन ! कभी-कभी ऐसा भी प्रतीत होता है कि मनुष्य कुछ सोचता है और विधाता को कुछ और ही स्वीकार होता है। आपने डॉक्टर बनने का निर्णय किया है लेकिन मेरा जीवन लक्ष्य सामान्य होकर भी असामान्य है। शायद आपको मेरे लक्ष्य को जानकर आश्चर्य होगा। बहिन! मैंने अध्यापिका बनने का निर्णय किया है। इस निर्णय के पीछे मेरी रुचि और प्रवृत्ति के अतिरिक्त कुछ और बातें भी हैं।
शिक्षक को राष्ट्र का निर्माता कहा गया है लेकिन आज का शिक्षक कर्त्तव्य पालन की अपेक्षा अर्थउपार्जन में अधिक रुचि रखता है। उसमें त्याग एवं तपस्या का अभाव होता जा रहा है। मैं शिक्षिका बन कर सच्चे अर्थों में शिक्षाजगत् की सेवा करना चाहती हूँ। मैं शिक्षका बनकर सबसे पूर्व अपने छात्रों में शिक्षा के प्रति रुचि उत्पन्न करूंगी। जब शिक्षा में मन लगता है तो अनुशासनहीनता का भाव अपने आप दूर हो जाता है। मेरा आदर्श होगा अपने शिष्यों को सच्चा ज्ञान प्रदान करना। मुझे जो भी विषय पढ़ाने को मिलेगा उसे पूरी रुचि के साथ पढ़ाऊंगी । इतिहास के विषय ऐसे पढ़ाऊंगी कि बीती हुई घटनाएं बच्चों के सामने चित्रावली बनकर घूमने लगें। मैं इस बात की ओर भी पूरा ध्यान दूंगी कि बच्चों ने मेरी बात को ग्रहण भी किया है या नहीं। आज का अध्यापक तो अपनी बात कह देने में ही अपने कर्त्तव्य की पूर्ति मानता है।
मैं छात्र-छात्राओं के प्रति सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार करूंगी लेकिन अनुशासन की अपेक्षा सहन नहीं करूंगी। बच्चों को ऐतिहासिक एवं पर्वतीय भ्रमण भी कराऊंगी ताकि वे सब कुछ आंखों से देखकर आनन्द का अनुभव करें। ‘सदा जीवन एवं उच्च विचार’ मेरे जीवन का मूलमंत्र रहेगा। सत्य एवं अहिंसा के समर्थक पैदा करने के लिए गांधी का आदर्श सामने रखूंगी। धर्म एवं संस्कृति की ध्वजा फहराने वालों के सामने शिवाजी एवं राणा प्रताप के वीरतापूर्ण कार्यों का वर्णन करूंगी।
हमारे गांव में शिक्षा का कितना अभाव है। भारत की आत्मा गांव हैं और ग्रामों की उन्नति के लिए शिक्षा की अत्यन्त आवश्यकता है। मुझे अवसर मिलेगा तो मैं ग्रामीण भोले-भाले बच्चों का उपयुक्त मार्गदर्शन करूंगी। उनमें सोई हुई शक्ति को जगाऊंगी। ईश्वर से प्रार्थना है कि वे मेरी यह महत्त्वाकांक्षा पूर्ण करें। अपनी कुशलता का समाचार लिखना।
आपकी सखी,
सुनीति ।
9. अपने मित्र को एक पत्र लिखकर उसे ग्रीष्मावकाश का कार्यक्रम बताओ।
अथवा
ग्रीष्मावकाश के अवसर पर भ्रमणार्थ अपने मित्र को निमंत्रण पत्र लिखिए।
37/9 रेलवे रोड,
प्रिय मित्र दिनेश,
सस्नेह नमस्कार ।
आशा है कि आप सब सकुशल होंगे। आपके पत्र से ज्ञात हुआ कि आपका विद्यालय ग्रीष्मावकाश Jay के लिए बंद हो चुका है। हमारी परीक्षाएं 18 मई को समाप्त हो रही हैं। इसके पश्चात् कालेज 15 जुलाई तक बंद रहेगा। इस बार हम पिताजी के साथ शिमला जा रहे हैं। लगभग 20 दिन तक हम शिमला में रहेंगे। वहां मेरे मामा जी भी रहते हैं। अतः वहां रहने में पूरी सुविधा रहेगी। शिमला के आस-पास सभी दर्शनीय स्थान देखने का निर्णय किया है। मेरै मामा जी के बड़े सुपुत्र वहां अंग्रेजी के प्राध्यापक हैं। उनकी सहायता एवं मार्ग दर्शन से मैं अपने अंग्रेजी के स्तर को भी बढ़ा सकूंगा ।
प्रिय मित्र, यदि आप भी हमारे साथ चलें तो यात्रा का आनन्द आ जाएगा, आप किसी प्रकार का संकोच न करें। मेरा माता-पिताजी भी आपको मेरे साथ देखकर बहुत प्रसन्न होंगे। आप शीघ्र ही अपने कार्यक्रम से सूचित करना। हमारा विचार जून के प्रथम सप्ताह में जाने का है।
शिमला से लौटने के बाद दिल्ली तथा आगरा जाने का विचार है। दिल्ली में अनेक दर्शनीय स्थान हैं। आगरा का ताजमहल तो मेरे आकर्षण का केन्द्र है क्योंकि मुझे अभी तक इस सुन्दर भवन को देखने का अवसर प्राप्त नहीं हुआ। आशा है कि इस बार यह जिज्ञासा भी शांत हो जाएगी। आप अपने कार्यक्रम से शीघ्र ही सूचित करें। अपने माता-पिता को मेरी ओर से सादर नमस्कार कहें।
आपका मित्र,
विजय कुमार ।
10. अपने मित्र अथवा अपनी सखी को उसके जन्म दिवस पर बधाई पत्र लिखिए।
45/6 माल रोड,
विजयपुर,
31 मार्च, 20……
प्रिय सखी नलिनी,
सस्नेह नमस्कार ।
आज ही आपका पत्र प्राप्त हुआ है। यह जानकर अत्यन्त प्रसन्नता हुई कि आप 4 अप्रैल को अपना 17वां जन्म दिवस मना रही है। इस अवसर पर आपने मुझे भी आमंत्रित किया है उसके लिए अतीव धन्यवाद ।
प्रिय सखी, मैं इस शुभावसर पर अवश्य पहुंचती लेकिन कुछ कारणों से उपस्थित होना सम्भव नहीं। मैं अपनी शुभकामनाएं भेज रही हूँ। ईश्वर से प्रार्थना है कि वे आपको चिरायु प्रदान करें। आपका भावी जीवन स्वर्णिम आभा से मण्डित हो। अगले वर्ष अवश्य आऊंगी। मैं अपनी ओर से एक छोटी-सी भेंट भेज रही हूँ। आशा है कि आपको पसंद आएगी। इसी शुभावसर पर अपने माता-पिता को मेरी ओर से हार्दिक बधाई अवश्य देना ।
आपकी प्रिय सखी,
मधु ।
11. अपने मित्र को उसके पिता के स्वर्गवास होने पर संवेदना पत्र लिखिए।
बिलावर,
21 जनवरी, 20…….
प्रिय मित्र,
कल्पना भी न की गई थी कि 19 जनवरी का दिन हम सबके लिए इतना भयंकर होगा। आपके पिता के निधन का समाचार पाकर बड़ा शोक हुआ। हाय ! यह विधाता का कितना निर्दय प्रहार हुआ है। आपके पिता की असामयिक मृत्यु से हमारे घर में शोक का वातावरण छा गया। सबकी आंखों से अश्रु धारा बहने लगी। मेरे पिताजी ने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा, मैंने अपना निकटतम मित्र तथा सहयोगी खो दिया है।”
प्रिय मित्र ! गत मास जब मैं आपको मिलने आया था तो उस समय आपके पिताजी कितने स्वस्थ थे। विधि का विधान भी बड़ा विचित्र है। उनका साधु व्यक्तित्व अब भी आंखों के सामने घूम रहा है। उनकी सज्जनता और परोपकार – भावना से सभी प्रभावित थे। उनके निधन से आपके परिवार को ही हानि नहीं पहुंची अपितु सारे नगर की हानि हुई है। उनकी शिक्षा में भी अत्यन्त रुचि थी । उन्हीं की प्रेरणा से आप प्रत्येक परीक्षा में शानदार सफलता प्राप्त करते रहे हैं।
प्रिय मित्र ! काल के आगे सब असहाय और विवश हैं। उसकी शक्ति से कोई नहीं बच सकता। उसके आगे सबने मस्तक झुकाया है । धैर्य धारण करने के अतिरिक्त दूसरा उपचार नहीं। हम सब आपके इस अपार दुःख में सम्मिलित होकर संवेदना प्रकट करते हैं । आप उत्साह से काम लीजिए। अपने छोटे भाइयों को सांत्वना दो। माताजी को भी इस समय आपके सहारे की आवश्यकता है । मित्र ! निश्चय ही आप पर भारी ज़िम्मेदारी आ पड़ी है । ईश्वर से मेरी नम्र प्रार्थना है कि वे आपको इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति दें और स्वर्गीय आत्मा को शान्ति प्रदान करें।
आपके दुःख में दुखी,
रवि ।
12. आपके मुहल्ले की समय पर सफ़ाई नहीं होती। अपने नगर की नगरपालिका के प्रधान को पत्र लिखकर मुहल्ले की सफ़ाई न होने की शिकायत कीजिए ।
अथवा
नगरपालिका प्रधान को प्रार्थना पत्र लिखिए जिसमें मुहल्ले की सफ़ाई के लिए अनुरोध किया गया हो।
513, शिवाजी नगर,
पहलगाँव ।
5 जनवरी, 20……….
सेवा में
स्वास्थ्य अधिकारी,
नगरपालिका,
पहलगाँव ।
महोदय,
निवेदन है कि मैं शिवाजी नगर का एक निवासी हूँ। यह नगर सफ़ाई की दृष्टि से पूरी तरह उपेक्षित है। इसे देखकर कभी-कभी तो ऐसा लगता है जैसे यह नगर पालिका के क्षेत्र से बाहर है। गाँव की गंदगी के विषय में तो केवल सुना था लेकिन यहां की गंदगी को प्रतिदिन आँखों से देखता हूँ । सफ़ाई कर्मचारी की नियुक्ति तो अवश्य हुई है लेकिन वह कभी-कभी ही दिखाई देता है। उसके व्यवहार में अशिष्टता भी है इधर-उधर गंदगी के ढेर लगाकर चला जाता है। नालियों का भी ठीक प्रबन्ध नहीं है। पानी निचले स्थान पर आकर रुक जाता है। मच्छरों के जमघट ने नाक में दम कर रखा है। अनेक प्रकार की बीमारियों के फैलने का भय बना रहता है ।
आपसे नम्र निवेदन है कि आप एक बार स्वयं इस नरक को आकर देख जाएं। तभी आप हमारी कठिनाई का अनुभव करेंगे। एक बार पहले भी आपकी सेवा में प्रार्थना कर चुके हैं। लगता है कि हमारी बात आप तक पहुंची नहीं अन्यथा इस नगर की दशा ऐसी न होती । कृपया इस कर्मचारी को चेतावनी दें ताकि वह अपने काम को ईमानदारी से करे ।
आशा है कि आप मेरा प्रार्थना पर ध्यान देंगे और शिवाजी नगर की सफाई का उचित प्रबन्ध करेंगे।
भवदीय,
सुरेश अरोड़ा
13. आपको जालन्धर के किसी पुस्तक विक्रेता से कुछ पुस्तकें मंगवानी हैं। वी० पी० पी० द्वारा मंगवाने के लिए पत्र लिखिए |
5/714, तिलक नगर,
जम्मू।
17 नवम्बर, 20….
सेवा में
प्रबंधक,
मल्होत्रा बुक डिपो,
रेलवे रोड,
जालन्धर ।
महोदय,
कृपया निम्नलिखित पुस्तकें वी० पी० पी० द्वारा शीघ्र भेजने का कष्ट करें। यदि अग्रिम भेजने की आवश्यकता हो तो सूचित करें। पुस्तकों पर उचित कमीशन काटना न भूलें ।
1. गोदान – एक समीक्षा ………. एक प्रति
2. हिन्दी गाइड (दशम् कक्षा) …………….एक प्रति
3. इंगलिश गाइड (दशम् कक्षा) ……….एक प्रति
4. नागरिक शास्त्र के सिद्धान्त …………..एक प्रति
5. भूगोल (दशम् कक्षा) ……….. एक प्रति
भवदीय,
सतीश धवन ।
14. आपके मुहल्ले में चोरी की घटनाएं बहुत होने लगी हैं। नगर के पुलिस अधीक्षक को मुहल्ले की सुरक्षा के लिए पत्र लिखिए।
10, गांधी नगर,
भद्रवाह ।
5 जून, 20….
सेवा में
पुलिस अधीक्षक,
भद्रवाह ।
मान्यवर,
प्रार्थना है कि मैं श्याम नगर का एक निवासी हूँ। हमारा यह नगर शहर से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां के अधिकांश निवासी निर्धन हैं। निर्धनता में चोगे हो जाना एक अभिशाप के समान है। गत एक सप्ताह में तीन चोरियाँ हो चुकी हैं। इन चोरियों में दो साइकिल, 25,000 रुपये की नकदी और एक भैंस शामिल है।
इन तीनों चोरियों की शिकायत निकटवर्ती थाने में लिखवा चुके हैं लेकिन अभी तक कोई परिणाम सामने नहीं आया। लोगों ने निराशा का भाव दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। कुछ परिवार तो इस नगर को छोड़ने तक का विचार कर रहे हैं। इस नगर के निवासियों के लिए चौकीदार का प्रबन्ध करना भी सम्भव नहीं। आपसे प्रार्थना है कि आप इस नगर की सुरक्षा की ओर ध्यान दें अन्यथा यह बसा बसाया नगर उजड़ जाएगा। कृपया एक सिपाही की नियुक्ति स्थायी रूप से कर दें। हम उसे पूरा सहयोग देंगे। आशा है कि आप हमारी प्रार्थना की ओर ध्यान देंगे और इस दिशा में शीघ्र ही कोई ठोस प्रबन्ध करेंगे।
भवदीय,
अमृतलाल गुप्ता,
15. समाचार पत्र में विज्ञापन कर्ता को नौकरी के लिए प्रार्थना पत्र लिखो।
83, नौराजी नगर,
बारामूला।
12 दिसम्बर, 20….
सेवा में
प्रबन्धक,
दयालसिंह कॉलेज,
बारामूला।
मान्यवर,
दिनांक 10 दिसम्बर, 20…. के दैनिक “हिन्दुस्तान” से ज्ञात हुआ है कि आपके यहां हिन्दी विषय के तीन प्राध्यापकों के स्थान रिक्त हैं। प्राध्यापक के पद की नियुक्ति के लिये आपने जो शैक्षणिक योग्यताएं मांगी हैं, मैं उसके लिए अपने आपको पूर्ण समर्थ समझता हूँ । अतः मैं आपकी सेवा में यह प्रार्थना पत्र भेज रहा हूँ। मेरी शैक्षणिक योग्यता तथा अनुभव का विवरण इस प्रकार है-
1. मैंने 20…… ई० में जम्मू विश्वविद्यालय से हिन्दी विषय में एम० ए० प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की।
2. एक वर्ष तक डी० ए० वी० कॉलेज, बारामूला में अस्थायी रूप से रिक्त प्राध्यापक के पद पर भी कार्य किया है।
3. स्कूल तथा कॉलेज जीवन में क्रिकेट तथा बैडमिण्टन में विशेष रुचि रही है ।
4. भाषण तथा वाद-विवाद प्रतियोगिता में भी अनेक बार प्रथम स्थान प्राप्त किया है ।
आवश्यक प्रमाण-पत्र इस प्रार्थना पत्र के साथ भेज रहा हूँ। मुझे पूर्ण आशा है कि आप मेरे प्रार्थनापत्र पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेंगे और मुझे अपनी ख्याति प्राप्त संस्था में काम करने का अवसर प्रदान करेंगे ।
धन्यवाद सहित,
भवदीय,
जगमोहन सहगल ।
16. बस द्वारा यात्रा करने पर आपको कुछ असुविधाओं का सामना करना पड़ा, उन्हें दूर करने के लिए बसप्रबन्धक को एक पत्र लिखिए।
शीला भवन,
कटरा ।
12 अप्रैल, 20….
सेवा में
प्रबन्धक,
जम्मू कश्मीर रोडवेज़,
श्रीनगर ।
महोदय,
निवेदन है कि मुझे कुछ दिन पूर्व जम्मू से श्रीनगर आने का अवसर मिला। मैंने समय पर टिकट खरीदा लेकिन जब बस में प्रवेश किया तो कोई भी स्थान रिक्त नहीं था। इसका कारण यह था कि बहुत से यात्री बिना टिकट के ही सवार थे। उन्होंने सोचा था कि मार्ग में टिकट खरीद लेंगे। मुझे खड़ा रहना पड़ा। मैंने कंडक्टर से शिकायत भी की कि उसने बिना टिकट खरीदे यात्रियों को बस में बैठने की अनुमति क्यों दी ? उसका उत्तर संतोषजनक नहीं था।
एक्सप्रैस बस को रास्ते में रोकना भी उचित नहीं। उसने यात्रियों के विरोध के बावजूद भी दो-तीन स्थानों पर बस रोकी। जिससे मुझे ही नहीं और भी अनेक यात्रियों को अपने-अपने कार्यालय में पहुंचने में देरी हो गई। यह न केवल अनुशासन का उल्लंघन है बल्कि रोडवेज बस सर्विस के नियमों का भी उल्लंघन है।
कंडक्टर ने 20-25 सवारियां अतिरिक्त चढ़ा रखी थीं। इससे सभी यात्री असुविधा अनुभव कर रहे थे। मुझे यह भी सन्देह है कि उसने कुछ यात्रियों से किराया तो वसूल कर लिया पर उन्हें टिकटें नहीं दीं। इस प्रकार का भ्रष्टाचार किसी प्रकार से भी सहन नहीं किया जा सकता।
बस कंडक्टर का नाम सोहनसिंह है। बस नं० जे० के० 06 2064 है।
मेरा विनम्र निवेदन है कि आप पूरी पूछताछ करने के बाद दोषी को उचित दण्ड दें ताकि फिर किसी यात्री को अनावश्यक कारणों से असुविधा का सामना न करना पड़े।
धन्यवाद सहित,
भवदीय,
दिलीप भारती
17. अपने प्रधानाचार्य को एक प्रार्थना पत्र लिखिए जिसमें कई महीने से अंग्रेजी की पढ़ाई न होने के कारण उत्पन्न कठिनाई का वर्णन किया गया हो ।
सेवा में
प्रधानाचार्य,
केन्द्रीय विद्यालय,
जम्मू।
महोदय,
आप भली-भांति जानते हैं कि हमारे अंग्रेज़ी के अध्यापक श्री ज्ञानचन्द जी पिछले तीन सप्ताह से बीमार हैं। अभी भी उनके स्वास्थ्य में विशेष सुधार नहीं हो रहा। डॉक्टर का कहना है कि अभी श्री ज्ञानचंद जी को स्वच्छ होने में कम-से-कम दो सप्ताह और लेंगे। पिछले तीन सप्ताह से हमारी अंग्रेजी की पढ़ाई ठीक ढंग से नहीं हो रही। आपने जो प्रबन्ध किया है, वह संतोषजनक नहीं। उधर परीक्षा सिर पर आ रही है। अभी पाठ्यक्रम भी समाप्त नहीं हुआ। पुनरावृत्ति के लिए तो अवसर ही नहीं रहेगा। अतः आप से विनम्र प्रार्थना है कि आप हमारी अंग्रेज़ी की पढ़ाई का उचित एवं संतोषजनक प्रबन्ध करें। यदि कुछ कालांश बढ़ावा दिये जाएं तो और भी अच्छा रहेगा।
आशा है कि आप हमारी कठिनाई को शीघ्र ही दूर करने का प्रयास करेंगे।
आपका आज्ञाकारी
नवनीत (दशम ‘क’)
तिथि 10-8-20….
18. अपने विद्यालय के प्रधानाध्यापक को छुट्टी के लिए आवेदन पत्र लिखिए।
अथवा
विवाह तय हो जाने के कारण आप दो दिन स्कूल नहीं जा सकेंगे। छुट्टी के लिए प्रधानाध्यापक को प्रार्थनापत्र लिखिए।
सेवा में
प्रधानाध्यापक,
केन्द्रीय विद्यालय,
जम्मू कैंट।
मान्यवर महोदय,
निवेदन है कि मेरी बड़ी बहन की शादी 11 नवम्बर, 20…. को दिल्ली में होनी तय हुई है। हमारे परिवार के सभी सदस्य वहां पहुंच चुके हैं। मैं और मेरी छोटी बहन 9 नवम्बर को रात की गाड़ी से दिल्ली जाएंगे। कृपा मुझे दस और ग्यारह नवम्बर का अवकाश प्रदान करें।
आपका आज्ञाकारी,
महेश धवन
कक्षा दशम् ‘ग’
तिथि 9 नवम्बर, 20…..
19. आपके मित्र को छात्रवृत्ति प्राप्त हुई है। उसे बधाई पत्र लिखिए ।
विवेक भवन,
सुभाष चौक,
जम्मू।
प्रिय मित्र सुमन,
सस्नेह नमस्कार ।
जम्मू-कश्मीर बोर्ड की दशम् कक्षा की परिणाम सूची में तुम्हारा नाम छात्रवृत्ति प्राप्त छात्रों की सूची में देखकर मुझे अतीव प्रसन्नता हुई । प्रिय मित्र, मुझे आपसे यही आशा थी । तुमने परिश्रम भी तो बहुत किया था । तुमने सिद्ध कर दिया कि परिश्रम की बड़ी महिमा है । 85 प्रतिशत अंक प्राप्त करना कोई खाला जी का घर नहीं। अपनी इस शानदार सफलता पर मेरी ओर से हार्दिक बधाई स्वीकार करें। अपने माता-पिता को भी मेरी ओर से बधाई देना न भूलें ।
ग्रीष्मावकाश में तुम्हारे पास आऊंगा । मिठाई तैयार रखना ।
आपका अपना,
विवेक कपूर ।
तिथि 29 मई, 20……
20. आपके मुहल्ले में प्रकाश की व्यवस्था कम है। विद्युत् अधिकारी को इस विषय पर पत्र लिखिए ।
720, गांधी नगर, भद्रवाह ।
13 जनवरी, 20…….
सेवा में
विद्युत् अधिकारी,
गांधी नगर,
भद्रवाह ।
आदरणीय महोदय,
आप भली-भांति जानते हैं कि गांधी नगर एक घनी आबादी वाला क्षेत्र है। इसमें एक के बाद एक बाइस गलियां हैं। ये गलियां सड़क से प्रारम्भ हो जाती हैं। ये गलियां एक दूसरे के साथ इस तरह सटी हुई हैं कि बाहर से आने वाला व्यक्ति दिन में भी कई बार गलत नम्बर की गली में प्रवेश कर जाता है। रात के अन्धेरे में तो यह कठिनाई और भी बढ़ जाती है। इस क्षेत्र में प्रकाश की व्यवस्था आवश्यकता से बहुत कम है। रोशनी का प्रबन्ध केवल सड़क के साथ लगने वाली गली के पास है। अधिकांश क्षेत्र में प्रायः रात के समय अन्धेरा रहता है। अतः आपसे सानुरोध प्रार्थना है कि प्रत्येक गली के सिरे पर प्रकाश की व्यवस्था कराएं। प्रकाश का समुचित प्रबन्ध होने से चोरों को भी चोरी का अवसर कम मिलता है।
आशा है कि आप मेरी प्रार्थना की ओर ध्यान देंगे।
भवदीय,
सुरेन्द्र शर्मा
21. नगर की सघन बस्ती में कल-कारखानों और यातायात से होने वाले ध्वनि प्रदूषण के विरुद्ध नगर योजना अधिकारी को एक पत्र लिखिए।
502, रवीन्द्र नगर,
जम्मू।
13 फरवरी, 20…….
सेवा में
नगर-योजना अधिकारी,
जम्मू।
आदरणीय महोदय,
आप इस तथ्य से भली-भान्ति परिचित हैं कि नगर की मज़दूर बस्ती कितनी घनी है। यहां कलकारखानों तथा यातायात के कारण होने वाले ध्वनि प्रदूषण ने बस्ती में रहने वालों का जीना मुश्किल कर दिया है। ऊर्जा एवं उष्णता उत्पन्न करने वाले संयन्त्रों, मोटर वाहनों तथा कल-कारखानों से निकलने वाले धुएं से यहां का वातावरण प्रदूषित बना रहता है। वायु के प्रदूषित हो जाने से सांस और फेफड़ों के रोग पनपते हैं, आंखों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। वाहनों और मशीनों के शोर से ध्वनि प्रदूषण फैलता है। कान बहरे हो जाते हैं। शारीरिक ही नहीं मानसिक रोग तक का मनुष्य शिकार हो जाता है। ऑक्सीजन की कमी हो जाने के कारण यहां अनेक प्रकार की बीमारियां अपना अड्डा जमाए हुए हैं। एक तो मज़दूर सारा दिन कल-कारखानों में काम करते रहते हैं, दूसरा उन्हें घर पर भी स्वस्थ वातावरण नहीं मिलता। आपसे अनुरोध पूर्वक प्रार्थना है कि कल-कारखानों को बस्ती से दूर कहीं नगर से बाहर ले जाने की योजना बनाएं। यातायात के लिए भी बस्ती की सड़कों की बजाय नगर के बाहर की सड़कों का अधिक प्रयोग किया जाए।
आशा है कि आप मेरी इस प्रार्थना पर ध्यान देंगे और इस दिशा में कोई ठोस प्रबन्ध करेंगे।
भवदीय,
नवल किशोर ।
22. पोस्ट मास्टर को मनीआर्डर गुम हो जाने की शिकायत कीजिए।
13, सरोजिनी नगर,
जम्मू।
5 फरवरी, 20….
सेवा में
पोस्ट मास्टर,
श्याम नगर,
जम्मू।
मान्यवर,
सेवा में निवेदन है कि मैंने 25 जून, 20…… को अपने दिल्ली निवासी छोटे भाई को सौ रुपये का मनीआर्डर करवाया था लेकिन एक मास बीत जाने पर भी वह उसे प्राप्त नहीं हुआ। लगता है कि आपके किसी कर्मचारी की लापरवाही के परिणामस्वरूप मनीआर्डर गुम हो गया है।
मनीआर्डर की रसीद का नं० 0042 है। रसीद मेरे पास सुरक्षित है। कृपया आप इस सम्बन्ध में उचित छानबीन करें। मेरे छोटे भाई को रुपये न मिलने के कारण असुविधा का सामना करना पड़ा है। सरकारी कार्यालय में इस प्रकार की लापरवाही उचित नहीं।
सधन्यवाद,
भवदीय,
नगेन्द्र,
23. अपने छोटे भाई को एक पत्र लिखिए जिसमें उसे खर्चीले फैशन की होड़ छोड़कर परिश्रम करने की प्रेरणा दी गई हो ।
425 – बी, मॉडल ग्राम।
पुंछ।
20 जून, 20…..
प्रिय राकेश,
चिरंजीव रहो ।
कल ही माता जी का पत्र प्राप्त हुआ है। उन्होंने लिखा है कि कॉलेज में प्रवेश लेते ही राकेश के रंग-ढंग बदल गए हैं। उसमें फैशन की प्रवृत्ति जाग उठी है । प्रिय अनुज, फैशन आडम्बर एवं दिखावे के लिए किया जाता है। इसमें धन का अपव्यय होता है, समय नष्ट होता है तथा अनेक प्रकार की चारित्रिक दुर्बलताएं जन्म लेती हैं। सादा जीवन, उच्च विचार ही मानव के सबसे बड़े आभूषण हैं। सच्चाई तथा ईमानदारी जैसी भावनाएं सादगी में ही रहती हैं। परिश्रम ही सफलता की कुंजी है। परिश्रम के बल पर ही तुमने दशम् कक्षा में शानदार सफलता प्राप्त की है। फैशन से दूर रहकर तथा परिश्रम के बल पर ही तुम अपने उज्ज्वल भविष्य का निर्माण कर सकते हो। परिश्रम की महिमा कौन नहीं जानता ?
शिक्षा-काल में तो फैशन विष के समान है। मुझे विश्वास है कि तुम फैशन की प्रवृत्ति से दूर रहोगे और परिश्रम के महत्त्व को समझते हुए अध्ययन में लीन रहोगे । शारीरिक, मानसिक तथा आध्यात्मिक शक्तियों का विकास ही शिक्षार्थी का लक्ष्य है।
तुम्हारा शुभचिन्तक,
पवन ।
24. अपने विद्यालय के प्रधानाचार्य को एक आवेदन पत्र लिखें जिसमें खेलों की आवश्यक तैयारी तथा खेल का सामान उपलब्ध कराने की प्रार्थना की गई हो ।
सेवा में
प्रधानाचार्य,
केन्द्रीय विद्यालय,
जम्मू।
महोदय,
आपने एक छात्र-सभा में भाषण देते हुए इस बात पर बल दिया था कि छात्रों को शिक्षा के साथसाथ खेलों का महत्त्व भी समझना चाहिए । खेल शिक्षा का एक महत्त्वपूर्ण अंग हैं। खेद की बात है कि आप खेलों की आवश्यकता तो खूब समझते हैं पर खेल सामग्री के अभाव की ओर कभी आपका ध्यान नहीं गया। खेलों के अनेक लाभ हैं। ये स्वास्थ्य के लिए बड़ी उपयोगी हैं। ये अनुशासन, समय पालन, सहयोग तथा सद्भावना का भी पाठ पढ़ाती हैं ।
में खेलों के प्रति अतः आपसे नम्र निवेदन है कि आप खेलों का सामान उपलब्ध करवाने की कृपा करें। इससे छात्रों रुचि बढ़ेगी और वे अपनी खेल प्रतिभा का विकास कर सकेंगे।
आशा है कि आप मेरी प्रार्थना पर उचित ध्यान देंगे और आवश्यक आदेश जारी करेंगे ।
आपका आज्ञाकारी,
महेश धवन ।
कक्षा दशम् ‘ब’
तिथि: 27 जुलाई, 20…….
25. अपने विद्यालय से प्रधानाचार्य को छात्रवृत्ति के लिए आवेदन – पत्र लिखिए।
सेवा में
प्रधानाचार्य,
केन्द्रीय विद्यालय,
श्रीनगर ।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि मैं आपके विद्यालय की दसवीं कक्षा का एक छात्र हूँ। मैं प्रथम श्रेणी से आपके विद्यालय में पढ़ रहा हूँ। मैंने परीक्षा में सदैव अच्छे अंक प्राप्त किए हैं। खेलकूद तथा विद्यालय के अन्य कार्यक्रमों में भी मेरी रुचि है। मुझे पुरस्कार भी प्राप्त हुए हैं। अपने सहपाठियों के प्रति मेरा व्यवहार हमेशा शिष्टतापूर्ण रहा है। अध्यापक वर्ग भी मेरे आचार-व्यवहार से सन्तुष्ट है ।
हमारे घर की आर्थिक स्थिति अचानक खराब हो गई है। मेरी पढ़ाई में बाधा उपस्थित हो गई है। मेरे पिता जी मेरी पढ़ाई का व्यय भार संभालने में स्वयं को असमर्थ पा रहे हैं । अतः आपसे मेरी विनम्र प्रार्थना है कि मुझे छात्रवृत्ति प्रदान करने की कृपा करें। मैं जीवन भर आपका आभारी रहूंगा। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि कठोर परिश्रम द्वारा मैं बोर्ड की परीक्षा में विशेष योग्यता प्राप्त करने वाले छात्रों की सूची में उच्च स्थान प्राप्त कर विद्यालय की शोभा बढ़ाऊंगा |
धन्यवाद सहित,
आपका आज्ञाकारी शिष्य,
विकास सूद ।
कक्षा – दशम् ‘ग’ ।
दिनांक : 7-11-20……
26. किसी दैनिक समाचार पत्र के सम्पादक को एक पत्र लिखिए जिसमें सामान्य नागरिकों की कठिनाइयों का वर्णन हो ।
27, आदर्श नगर,
जम्मू।
15 मार्च, 20……
सेवा में
मुख्य सम्पादक,
नव भारत टाइम्स,
नई दिल्ली।
आदरणीय महोदय,
मैं आपके लोकप्रिय पत्र के माध्यम से अपने निम्नांकित विचार अपने प्रदेश के अधिकारियों तक पहुँचाना चाहता हूँ-
(क) जम्मू नगर का निरन्तर विकास हो रहा है। दूर-दूर तक बस्तियां बन गई हैं। इन बस्तियों तक पहुंचने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से बहुत कम स्थानीय बसें चलाई गई हैं। बस सेवा उपलब्ध न होने के कारण नागरिकों को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
(ख) नगर निगम भी अपने कर्त्तव्य का पालन नहीं कर रही है। स्थान-स्थान पर गन्दगी के ढेर पड़े रहते हैं, जिनसे बीमारियां फैलने का भय रहता है।
(ग) बिजली का संकट भी दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। बिजली के बन्द रहने के कारण नलों में जल का अभाव रहता है, पानी के अभाव के कारण भी नागरिकों को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। मेरा नम्र निवेदन है कि उक्त कठिनाइयों की ओर सम्बन्धित अधिकारी ध्यान दें और इनके निवारण का समुचित प्रबन्ध करें।
भवदीय,
सुधीर,
27. कक्षा में विलम्ब से पहुंचने के कारण दण्डित होने पर देरी से आने के कारण स्पष्ट करते हुए क्षमा हेतु प्रधानाचार्य को प्रार्थना पत्र लिखिए ।
सेवा में
प्रधानाचार्य,
सावन पब्लिक स्कूल,
श्रीनगर ।
महोदय,
सविनय निवेदन यह है कि छोटे भाई के अचानक सीढ़ियों से गिर जाने के कारण उसे सिर पर गहरी चोट लग गई। उसे अस्पताल ले जाने के कारण मैं विद्यालय समय पर नहीं पहुँच सका। गणित के अध्यापक महोदय का टैस्ट भी नहीं दे सका। मेरे स्पष्टीकरण देने पर भी उन्होंने मुझे 20 रुपये जुर्माना कर दिया ।
आपसे नम्र निवेदन है कि आप मेरी विवशता को देखते हुए मुझे क्षमा कर देंगे ।
सधन्यवाद,
आपका आज्ञाकारी शिष्य,
साहिल सूद,
कक्षा दशम ‘क’ ।
दिनांक 25-7-20….
28. अपने छोटे भाई के जन्म दिवस पर आमन्त्रित करते हुए मित्र को पत्र लिखिए।
परीक्षा भवन,
25 मार्च, 20….
प्रिय मित्र विकास,
सप्रेम नमस्कार ।
आपको यह जानकर प्रसन्नता होगी कि मेरे अनुज दीपक का जन्म दिवस 12 दिसम्बर, 20….. को सायं पांच बजे घर के आंगन में मनाया जाएगा। इस शुभ अवसर की शोभा बढ़ाने के लिए कुछ प्रसिद्ध गायक भी सम्मिलित होंगे। आपसे अनुरोध है कि आप भी इस अवसर की शोभा बढ़ाने के लिए पधारें और अनुज दीपक को आशीर्वाद देने की कृपा करें।
आशा है कि आप निराश नहीं करेंगे।
आपका अभिन्न मित्र
क, ख, ग ।
29. अपने नगर के समाचार पत्र के सम्पादक को एक पत्र लिखकर मोहल्ले में चल रही जुआखोरी की जानकारी दीजिए।
655, शास्त्री नगर,
श्रीनगर ।
20 मार्च, 20……
सेवा में
सम्पादक,
पंजाब केसरी,
जालन्धर ।
आदरणीय महोदय,
मैं आपके लोकप्रिय समाचार पत्र के माध्यम से अपने विचार नगर के प्रशासन अधिकारियों तक – पहुंचाना चाहता हूँ।
मैं श्रीनगर के शास्त्री नगर का एक निवासी हूँ। हमारे क्षेत्र में नगर निगम का एक बहुत बड़ा पार्क है। उसमें प्रायः जुआ खेलने वालों का जमघट रहता है । वे एक-दूसरे के प्रति गालियां ही नहीं बकते बल्कि हाथापाई तक उतर आते हैं। एक-दूसरे को मारने के लिए चाकू तक निकाल लेते हैं। जुआखोरी के कारण उस पार्क में न बच्चे खेल सकते हैं और न इस क्षेत्र के निवासी उसमें भ्रमण कर सकते हैं। युवतियां तथा स्त्रियां तो उस पार्क में जा ही नहीं सकतीं।
मेरी आपसे सानुरोध प्रार्थना है कि आप मेरे इन विचारों को अपने समाचार पत्र में स्थान दे ताकि सम्बद्ध अधिकारियों तक इस जुआखोरी की सूचना पहुंच सके और वे उचित कार्यवाही करने के लिए बाध्य हो जाएं। आशा है कि भ्रष्टाचार तथा समाज-विरोधी कार्य को समाप्त करने में आप अपना योगदान देंगे।
भवदीय,
राकेश,
30. बड़ी बहन के नाते अपने भाई को रक्षा बन्धन के अवसर पर राखी भेजते हुए एक पत्र लिखिए।
6/753, लखनपुरा,
रामनगर ।
प्रिय अनुज प्रतीक ।
चिरंजीव रहो।
तुम्हारा पत्र मिला। यह जानकर बड़ी प्रसन्नता हुई कि तुमने मासिक परीक्षा में अपनी श्रेणी में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। मेरा आशीर्वाद तुम्हारे साथ है। अगले सप्ताह रक्षा बंधन का त्योहार है। मैं इस पत्र के साथ राखी के तार भेज रही हूँ। प्रिय अनुज, इन राखी के तारों में बड़ी शक्ति और प्रेरणा का भाव है। इस दिन भाई अपनी बहन की मान-मर्यादा की रक्षा का संकल्प करता है। बहन भी भाई की सर्वांगीण प्रगति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करती है ।
मैं इस बार रक्षा-बन्धन के अवसर पर तुम्हारे कोमल हाथों में राखी बांधने के लिए उपस्थित न हो सकूंगी । मेरा प्यारा, मेरा आशीर्वाद तथा मेरी शुभ कामना इन राखी के तारों में गुंथी हुई है।
माता-पिता को प्रणाम ।
तुम्हारी बड़ी बहन,
नीलम खन्ना ।
तिथि : 7-4-20…
31. अध्यक्ष परिवहन निगम को अपने गांव तक बस सुविधा उपलब्ध कराने के लिए एक पत्र लिखिए।
मकान नं० 10,
गाँव सोनपुरा,
जम्मू।
13 मार्च 20…….
सेवा में
अध्यक्ष,
राज्य परिवहन निगम,
जम्मू।
महोदय,
मैं गाँव ‘सोनपुरा’ का एक निवासी हूँ। यह गांव जम्मू से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर है। खेद की बात है कि परिवहन निगम की ओर से इस गांव तक कोई बस सेवा उपलब्ध नहीं है। यहां के किसानों को नगर से कृषि के लिए आवश्यक सामान लाने में बड़ी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। छात्र-छात्राओं को अपनेअपने विद्यालयों तथा महाविद्यालयों में पहुंचने के लिए कठिनाई का सामना करना पड़ता है। अतः आपसे सानुरोध प्रार्थना है कि इस गांव तक बस सेवा उपलब्ध करवाने की कृपा करें।
आशा है कि हमारी प्रार्थना पर शीघ्र ध्यान दिया जाएगा।
धन्यवाद सहित,
भवदीय,
रमेश बाल रत्न,
32. अपने मुख्याध्यापक को प्रार्थना पत्र लिखें, जिसमें पाठशाला प्रमाण-पत्र (सर्टीफिकेट) लेने के लिए प्रार्थना हो ।
सेवा में
मुख्याध्यापक,
आदर्श विद्या मन्दिर,
कश्मीर ।
विषय : पाठशाला त्यागने का प्रमाण-पत्र ।
महोदय,
निवेदन है कि मैंने सी सत्र में आपके विद्यालय से मैट्रिक की परीक्षा प्रथम श्रेणी में पास की है। मेरा स्कूल का रोल नं० ……….. तथा बोर्ड की वार्षिक परीक्षा का रोल नं० ……. था। अब चूंकि मैंने कॉलेज में प्रवेश लेना है जिसके लिए मुझे पाठशाला प्रमाण-पत्र एवं चरित्र प्रमाण-पत्र चाहिए । आपसे विनम्र प्रार्थना है कि यह प्रमाण पत्र मुझे शीघ्र जारी करने की कृपा करें। मैंने स्कूल के पुस्तकालय की सभी पुस्तकें यथा समय लौटा दी हैं तथा अन्य कोई भी देय मेरे नाम नहीं है । पुस्तकालय अध्यक्ष का प्रमाण-पत्र इस प्रार्थना पत्र के साथ संलग्न है ।
आपकी इस कृपा के लिए मैं हृदय से आभारी हूंगा।
आपका आज्ञाकारी शिष्य
रवि
अनुक्रमांक – 2
दिनांक 5, जून, 20……
33. पत्र मित्र को : ग्रीष्मावकाश साथ बिताने का निमन्त्रण |
नानक नगर,
जम्मू।
दिनांक…….
प्रिय मित्र,
नमस्ते ।
आपका पत्र मिला, धन्यवाद ।
आपने अपने पत्र में सूचित किया है कि आपके स्कूल में गर्मियों की छुट्टियां अगले सप्ताह से शुरू हो रही हैं। इन्हीं दिनों हमें भी स्कूल में छुट्टियां होंगी। मेरा सुझाव है कि इस बार आप अपनी गर्मी की छुट्टियां मेरे साथ बिताएं। हम दोनों मिलकर जम्मू क्षेत्र की सैर करेंगे। इन दिनों में यहां का मौसम भी बड़ा सुहावना होता है।
आप तो जानते ही हैं कि जम्मू क्षेत्र अपने प्राकृतिक सौन्दर्य के लिए विख्यात है। कश्मीर की यात्रा को जाने वाले अनेक पर्यटक कुछ दिनों के लिए इस क्षेत्र में रुक कर प्राकृतिक सुषमा का आनन्द उठाते हैं। यहां मानसर झील, सरुइसर झील, कैलाश झील तथा सनासर झील जैसी अनेक झीलें हैं जो प्रायः पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र रहती हैं। इन झीलों का मीठा जल एवं प्राकृतिक सौन्दर्य विशेष रूप से उल्लेखनीय है । बटोत में स्थित ‘अमृत-चश्मे’ के विषय में यहां प्रसिद्ध है कि इसका जल अजीर्ण रोग के लिए बड़ा उपयुक्त है।
आप तो जानते हैं कि जम्मू में विश्वविख्यात माता वैष्णो देवी का मन्दिर है। हम वहां की यात्रा तो अवश्य ही करेंगे। साथ ही मैं तुम्हें इस क्षेत्र के कुछ अन्य मन्दिरों के भी दर्शन करवाऊंगा जिनमें बाबौर के मन्दिर, बलबार का मन्दिर, विर्मयी के मन्दिर आदि । ये सभी मन्दिर धार्मिक महत्त्व के अतिरिक्त प्राचीन वास्तुकला के लिए भी प्रसिद्ध हैं।
मुझे पूर्ण आशा है कि आप इन गर्मियों की छुट्टियों में अवश्य ही यहां पधारेंगे। हम दोनों साथ-साथ प्रकृति के सौन्दर्य का रसपान करेंगे। घर में सब बड़ों को मेरा प्रणाम कहना और छोटों को प्यार | आपके उत्तर की मुझे प्रतीक्षा रहेगी।
आपका मित्र,
सुरेश ।
34. भारत सरकार के गृह मंत्रालय के सचिव की ओर से मुख्य सचिव, जम्मू-कश्मीर राज्य को एक सरकारी पत्र लिखें जिसमें राज्य में कानून और व्यवस्था की बिगड़ती हुई स्थिति पर चिन्ता व्यक्त की गयी हो ।
संख्या 48 ( गृ० पं० )/12.8.50/95-96/50195
भारत सरकार,
गृह मंत्रालय, नई दिल्ली।
11 जुलाई, 2.0….
प्रेषक
सचिव,
भारत सरकार,
गृह मंत्रालय |
नई दिल्ली।
सेवा में
मुख्य सचिव,
जम्मू-कश्मीर राज्य,
श्रीनगर ।
विषय – राज्य में कानून तथा व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति ।
महोदय,
मुझे यह सूचना देने का निर्देश हुआ है कि आपके राज्य में कानून और व्यवस्था की दिनों-दिन बिगड़ती स्थिति से केन्द्र सरकार बहुत चिन्तित है। सरकार ने आपका ध्यान इस गम्भीर समस्या की ओर आकृष्ट किया है और इस स्थिति के दृढ़ता से निपटने का निश्चय किया है। जम्मू-कश्मीर सरकार को भी इस दिशा में कड़े पग उठाने चाहिएं।
इस सन्दर्भ में आपको सूचित किया जाता है कि राज्य में कानून तथा व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कार्यवाही की जाए तथा केन्द्र सरकार को भी प्रगति से अवगत कराया जाए। इस सम्बन्ध में केन्द्र सरकार राज्य सरकार को सब प्रकार की सहायता देने के लिए तैयार है।
भवदीय,
ह० प्रशान्त
सचिव, गृह मन्त्रालय ।
35. सूखा के कारण राज्य के अनेक भागों में फसल नष्ट हो जाने के कारण केन्द्र सरकार के गृह मन्त्रालय को समुचित सहायता देने के लिए सरकार के मुख्य सचिव की ओर से पत्र लिखें ।
क्रमांक 95-96/5 / सू० / 40501
जम्मू-कश्मीर सरकार,
गृह विभाग, श्रीनगर।
15 जुलाई, 20……
प्रेषक
मुख्य सचिव,
जम्मू-कश्मीर राज्य,
श्रीनगर ।
सेवा में
सचिव,
गृह मन्त्रालय,
भारत सरकार,
नई दिल्ली।
विषय – सूखा पीड़ितों की सहायता के लिए प्रार्थना पत्र |
महोदय,
मुझे यह सूचित करने का निर्देश हुआ है कि वर्षा न होने के कारण राज्य के अनेक भागों में सूख कर नष्ट हो गयी हैं जिसमें किसानों की दशा अत्यन्त दयनीय है । फसलें सरकार ने प्रदेश में सूखे की स्थिति का मूल्यांकन करने के लिए एक आयोग नियुक्त किया था जिसने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों का निरीक्षण किया और यह निष्कर्ष निकाला है कि सूखे से बचने के लिए नलकूपों, नहरों आदि का प्राथमिकता के आधार पर निर्माण कराया जाए। इस आयोग ने सूखा पीड़ित किसानों को आर्थिक सहायता देने की भी अनुशंसा की है।
सरकार स्थिति को गम्भीरता तथा साधनों की अपर्याप्तता देखते हुए केन्द्र सरकार से सूखा पीड़ितों तथा अन्य विकास कार्यों के लिए चार अरब रुपए का विशेष अनुदान स्वीकार करने की प्रार्थना करती है जिससे प्रभावित लोगों की सहायता की जा सके।
भवदीय,
ह० मुख्य सचिव,
जम्मू कश्मीर राज्य |
36. छोटे भाई को पत्र लिखिए जिसमें मोबाइल की उपयोगिता का वर्णन हो ।
48 – टैगोर भवन, जम्मू विश्वविद्यालय,
जम्मू।
दिनांक : 20 मई, 20…
प्रिय श्याम,
स्नेह !
तुम्हारा पत्र मिला। पढ़कर अच्छा लगा कि तुमने मोबाइल ले लिया है। अब हमारा परस्पर संपर्क हर समय हो सकेगा, परन्तु इस का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए । मोबाइल तुम्हारा ऐसा साथी है, जो तुम्हारी हर मुसीबत में तुम्हारा साथ देगा। कोई भी कठिनाई आने पर तुम इस पर उस व्यक्ति से संपर्क कर सकते हो जो तुम्हारी सहायता कर सकता है। इससे संदेश भेजे जा सकते हैं, संगीत सुना जा सकता है, फोटो खींच सकते हैं, कैलकुलेटर का काम ले सकते हैं, अनेक व्यक्तियों के संपर्क नम्बर दर्ज कर सकते हैं, विदेशी मुद्रा का विनिमय, कैलेंडर, समय आदि सभी सुविधाएँ इस पर उपलब्ध हैं। आशा है इन सबका आवश्यकता के अनुसार उपयोग करोगे, परन्तु अपनी पढ़ाई छोड़कर दिन भर इस पर नहीं लगे रहना । माता जी, पिता जी को प्रणाम कहना ।
तुम्हारा बड़ा भाई,
संजीव ।
37. अपने पिता जी को पत्र लिखिए जिसमें मैट्रिक की परीक्षा पास करने के उपरान्त आगे क्या करने की इच्छा का उल्लेख किया गया है।
48 – मॉडल टाऊन
जम्मू ।
दिनांक 17 अप्रैल, 20
पूजनीय पिता जी,
चरणवंदना। आशा है कि आप स्वस्थ होंगे। मेरी वार्षिक परीक्षा कुछ दिन बाद आरंभ होने वाली है। मैंने उसके लिए अच्छी तैयारी कर ली है। मुझे आशा है कि परीक्षा में मेरे अच्छे अंक आएंगे। आपने अपने पत्र में पूछा है कि मैं परीक्षा पास करने के पश्चात् आगे क्या करना चाहूँगा। मेरी इच्छा है कि दसवीं की परीक्षा पास करने के बाद अभी दो वर्ष के लिए इसी स्कूल में अपनी पढ़ाई जारी रखूं । यह स्कूल बहुत अच्छा है और इसके अध्यापक बहुत परिश्रमी हैं। बारहवीं कक्षा पास करने के बाद मैं किसी अच्छे इंजनियरिंग कॉलेज में जाना चाहूँगा। शेष ठीक है।
मम्मी को मेरी ओर से चरण वंदना कहना ।
आपका सुपुत्र,
दिनेश गुप्ता |
38. प्रधानाचार्य को आवेदन पत्र लिखिए जिसमें चिकित्सा अवकाश के लिए प्रार्थना की गई हो।
सेवा में
प्रधानाचार्य
केन्द्रीय विद्यालय,
जम्मू।
महोदय,
निवेदन है कि मैं आपके विद्यालय में कक्षा दसवीं का छात्र हूँ। मुझे कल रात को अकस्मात् ज्वर हो गया था और अभी तक उतरा नहीं। डॉक्टर साहब ने मुझे पूर्ण विश्राम करने की सलाह दी है । इस कारण मैं दो दिन विद्यालय में उपस्थित नहीं हो सकता । अतः कृपा करके मुझे दो दिन का चिकित्सा अवकाश प्रदान कर कृतार्थ करें।
धन्यवाद सहित
आपका आज्ञाकारी शिष्य,
असलम
कक्षा दसवीं
दिनांक 20 अप्रैल, 20……