JKBOSE 9th Class Hindi Grammar Chapter 6 उपसर्ग, प्रत्यय, समास, संधि
JKBOSE 9th Class Hindi Grammar Chapter 6 उपसर्ग, प्रत्यय, समास, संधि
Jammu & Kashmir State Board JKBOSE 9th Class Hindi Grammar
J&K State Board class 9 Hindi Grammar
1. उपसर्ग
परिभाषा— उपसर्ग उस शब्दांश अथवा अव्यय को कहते हैं जो किसी शब्दांश अथवा अव्यय धातु के साथ मिलकर विशेष अर्थ प्रकट करता है। उपसर्गों का कोई स्वतंत्र अस्तित्व नहीं होता फिर भी वे अपने शब्दों के साथ मिलकर एक विशेष अर्थ को प्रकट करते हैं। पसर्ग हमेशा शब्द के आदि में लगते हैं। जैसे अन उपसर्ग को जान शब्द के पहले लगा देने से एक नया शब्द अनजान बन जाता है। कभी-कभी उपसर्ग लगाने से शब्द में कोई विशेष अन्तर नहीं आता। उसका अर्थ प्रायः ज्यों का त्यों बना रहता है। भ्रमण से पहले परि उपसर्ग लगाने से परिभ्रमण शब्द बनता है पर भ्रमण और परिभ्रमण के अर्थ में कोई अन्तर नहीं। कभी-कभी उपसर्ग लगाने से अर्थ में विपरीतता आ जाती है।
ऊपर के संक्षिप्त विवेचन से यह निष्कर्ष निकलता है—
(क) उपसर्ग के प्रयोग से शब्द के अर्थ में नवीनता आ जाती है।
(ख) उपसर्ग के प्रयोग से पहले शब्द के अर्थ में कोई अंतर नहीं आता।
(ग) उपसर्ग के प्रयोग से शब्द के अर्थ में विपरीतता आ जाती है।
उपसर्ग लगाने से ही शब्द के अनेक अर्थ हो जाते हैं। देखिए —
| उपसर्ग | शब्द | अर्थ |
| अप | अपहार | चोरी |
| प्र | प्रहार | चोट |
| सं | संहार | नाश |
| वि | विहार | भ्रमण |
| परि | प्रतिहार | उपाय या परित्याग |
हिंदी में जो उपसर्ग मिलते हैं वे संस्कृत, हिन्दी, उर्दू और अंग्रेज़ी भाषा के हैं, में प्रयुक्त होने वाले उपसर्गों की संख्या इस प्रकार है—
(i) संस्कृत के उपसर्ग = 22
(ii) हिंदी के उपसर्गों की तरह प्रयुक्त होने वाले संस्कृत के शब्द = 29
(iii) हिंदी के उपसर्ग = 15
(iv) उर्दू के उपसर्ग = 19
(v) अंग्रेज़ी के उपसर्ग = 5
2. प्रत्यय
परिभाषा— जो शब्दांश किसी शब्द के अन्त में जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन ला दें, उन्हें प्रत्यय कहते हैं। ये भी उपसर्गों की तरह अविकारी या अव्ययय शब्द या शब्दांश हैं, पर जो शब्दों के पीछे लगते हैं।
जैसे— मनुष्य + त्व = मनुष्यत्व
शिशु + ता = शिशुता
समाज + इक = सामाजिक
भल + आई = भलाई।
प्रत्यय के भेद—
प्रत्यय साधारणतया तीन प्रकार के होते हैं—
1. कारक या विभक्ति प्रत्यय ।
2. कृदंत प्रत्यय ।
3. संज्ञा या तद्धति प्रत्यय ।
1. विभक्ति प्रत्यय— संज्ञा या सर्वनाम शब्दों के साथ ने, को, से, के लिए, का, के, की, में पर आदि प्रत्ययों का प्रयोग होता है। ये कारकों के चिन्ह होने के कारण विभक्ति प्रत्यय कहलाते हैं।
2. कृदंत प्रत्यय— क्रिया या धातु के अन्त में प्रयुक्त होने वाले प्रत्ययों को कृत् प्रत्यय कहा जाता है और उनके मेल से बने शब्द को कृदंत (कृत + अन्त) । ये प्रत्यय क्रिया और धातु के शब्दों को नया रूप देते हैं। कृत् प्रत्यय में संज्ञा और विशेषण बनते हैं। जैसे- डूबता, होनहार, उड़ती आदि शब्द कृदंत हैं, जो डूबना, होना और उड़ना क्रियाओं से बने हैं।
कृदंत के भेद—
कृदंत के चार मुख्य भेद हैं—
1. वर्तमानकालिन कृदन्त
2. भूतकालिक कृदन्त
3. भविष्यकालिक कृदन्त
4. पूर्वकालिक कृदन्त
1. वर्तमान कालिन कृदन्त— धातु के अन्त में या प्रत्यय जोड़ने से वर्तमान कालिक कृदन्त का रूप बनता है।
2. भूतकालिक कृदन्त— सामान्य भूतकाल की क्रिया का जब विशेषण के रूप में प्रयोग होता है तब उसे भूतकालिक कृदन्त की संज्ञा दी जाती है। जैसे – सुनी, देखी, आई आदि कृदन्त सुनना, देखना और आना क्रियाओं से बने हैं। इनका प्रयोग प्रायः विशेषण के रूप में होता है।
3. भविष्यकालिक कृदन्त— जिन क्रियाओं के अन्त में वाला या हारा प्रत्यय लगता है, वे भविष्यकालिक कृदन्त कहलाते हैं। जैसे-होनहार, सोने वाले, जागने वाले आदि ।
4. पूर्वकालिक कृदन्त— जो शब्द वाक्य की मुख्य क्रिया के पूर्व आने वाली क्रिया समाप्ति बनाते हैं वे पूर्वकालिक कृदन्त कहलाते हैं जैसे – देकर लेकर आदि ।
तद्धित प्रत्यय— संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रियाविशेषण में लगने वाले प्रत्यय तद्धित प्रत्यय कहलाते हैं ।
तद्धित प्रत्यय के मुख्य भेद निम्नलिखित हैं—
1. कर्तृवाचक तद्धित
2. भाववाचक तद्धित
3. विशेषण प्रत्यय
4. लघुतावाचक तद्धित
1. कर्तृवाच्य तद्धित
जो शब्द क्रिया के अतिरिक्त अन्य शब्दों में प्रत्यय लगने से बनते हैं और संज्ञा बनकर वाक्यों में कर्त्ता के रूप में प्रयुक्त होते हैं, उन्हें कर्तृवाचक तद्धित कहते हैं। ये शब्द प्राय: जातिवाचक और व्यक्तिवाचक संज्ञाओं से बनते हैं।
2. भाववाचक तद्धित
संज्ञा, विशेषण या क्रिया शब्दों में प्रत्यय लगने से जो शब्द बनते हैं, वे भाववाचक तद्धित होते हैं ।
3. विशेषण प्रत्यय
संज्ञा या क्रिया शब्दों में जिन प्रत्ययों को लगाने से विशेषण शब्द बनाए जाते हैं, उन्हें विशेषण प्रत्यय कहते हैं ।
4. लघुतावाचक तद्धित जातिवाचक
संज्ञाओं में इया, ई, डा, री आदि प्रत्ययों के प्रयोग से लघुतावाचक तद्धित शब्द बनाते हैं।
| जातिवाचक संज्ञा | प्रत्यय | लघुतावाचक तद्धति |
| खाट | ईया | खटिया |
| छाता | री | छरी |
| मुख | ड़ा | मुखड़ा |
3. समास विग्रह: परिभाषा तथा उदाहरण
समास— परस्पर सम्बन्ध रखने वाले दो अथवा दो से अधिक शब्दों के मेल का नाम समास है। जैसे-राजा का पुत्र = राजपुत्र ।
समास के भेद – (i) अव्ययी भाव, (ii) तत्पुरुष (iii) द्वन्द्व (iv) बहुब्रीहि ।
1. अव्ययी भाव
जिस समास का पहला खण्ड प्रधान हो वह अव्ययी भाव समास होता है। पहला खण्ड अव्यय होता है।
जैसे—
| यथाशक्ति | शक्ति के अनुसार |
| आजीवन | जीवन भर |
| क्षण-क्षण | प्रतिक्षण |
| आजन्म | जन्म भर |
| भरपेट | पेट भर कर |
2. तत्पुरुष
जिस समय में दूसरा खण्ड प्रदान होता है उसे तत्पुरुष समास कहते हैं। जैसे— राजा का महल।
तत्पुरुष समास के भेद इस प्रकार हैं—
(i) कर्म तत्पुरुष
| शरणापन्न | शरण को (में) आपन्न, गत |
| सुख प्राप्त | सुख को प्राप्त |
| स्वर्गगत | स्वर्ग को गत |
| ग्रामगत | ग्राम को गत |
| शरणागत | शरण को आगत |
(ii) करण तत्पुरुष
| दईमारा | दैव से मारा |
| मुंहमांगा | मुंह से मांगा |
| हृदयहीन | हृदय से हीन |
| गुणयुक्त | गुणों से युक्त |
| मनमानी | मन से मानी |
(iii) सम्प्रदान तत्पुरुष
| हवन सामग्री | हवन के लिए सामग्री |
| देशभक्ति | देश के लिए भक्ति |
| रसोई घर | रसोई के लिए घर |
| सत्याग्रह | सत्य के लिए आग्रह |
| युद्धक्षेत्र | युद्ध के लिए क्षेत्र |
(iv) अपादान तत्पुरुष
| जन्म रोगी | जन्म से रोगी |
| नरकभय | नरक से भय |
| स्वर्गपतित | स्वर्ग से पतित |
| जीवनमुक्त | जीवन से मुक्त |
| धर्मभ्रष्ट | धर्म से भ्रष्ट |
प्रश्न और अभ्यास
प्रश्न 1. व्यंजन संधि और विसर्ग संधि में क्या अंतर है ? उसे उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर— व्यंजन संधि वहाँ होती है जब पहले शब्द के अंत में व्यंजन हो और दूसरे शब्द के आदि में व्यंजन या स्वर हो तब दोनों के मिलने से जो परिवर्तन होता है। जैसेसत् + जन = सज्जन, जगत् + ईश = जगदीश विसर्ग संधि वहाँ होती है जब विसर्ग का किसी स्वर या व्यंजन के साथ मेल होने पर परिवर्तन होता है। जैसे— नमः + ते = नमस्ते, दु: + उपयोग = दुरुपयोग ।
प्रश्न 2. संधि-विच्छेद से आप क्या समझते हैं ? दो उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर— जब संधि युक्त शब्दों को अलग-अलग करके लिखा जाता है तब उसे संधिविच्छेद कहते हैं। जैसे- महोत्सव = महा + उत्सव, उज्ज्वल = उत् + ज्वल, निर्धन = निः + धन।
प्रश्न 3. निम्नलिखित शब्दों का संधि-विच्छेद कीजिए—
कवींद्र, दुरुपयोग, निस्संदेह, दुःशासन, मनोभाव, अधोगति, सच्चरित्र, परोपकार, सूर्योदय, सूर्यास्त, वाड्मय, वागीश, सदाचार, इत्यादि, स्वागत, मतैक्य, सर्वोदय, महेंद्र, सूक्ति, दिनेश, हरीश, राजार्षि, अत्यधिक, मनस्ताप, निष्पक्ष ।
उत्तर— कवी + इंद्र, दु: + उपयोग, निः + संदेह, दु: + शासन, मनः + भाव, अध: + गति, सत् + चरित्र, पर + उपकार, सूर्य + उदय, सूर्य + अस्त, वाक् + मय, वाक् + ईश, सत् + आचार, इति + आदि, सु + आगत, मत + ऐक्य, सर्व + उदय, महा + इंद्र, सु + उक्ति, दिन + ईश, हरि + ईश, राज + ऋषि, अति + अधिक, मनः + ताप, निः + पक्ष।
प्रश्न 4. निम्नलिखित शब्दों में संधि कीजिए और संधि का नाम भी बताइए—
मुनि इंद्र, स्व + अधीन, दिक् + गज, गण + ईश, धर्म + आत्मा, रजनी + ईश, सत् + मार्ग, निः + धन, तत् + लीन, निः + पक्ष, महा + ईश, दु: + कर्म, महा + आत्मा, राका + ईश, गिरि + ईश, रमा + ईश, तत् + मय ।
उत्तर— मुनींद्र (स्वर संधि ), स्वाधीन (स्वर संधि), दिग्गज (व्यंजन संधि ), गणेश (स्वर संधि), धर्मात्मा (स्वर संधि), रजनीश (स्वर संधि ), सन्मार्ग (व्यंजन संधि), निर्धन (विसर्ग संधि), तल्लीन (व्यंजन संधि), निष्पक्ष (विसर्ग संधि), महेश (स्वर संधि), दुष्कर्म (विसर्ग संधि), महात्मा (स्वर संधि), राकेश (स्वर संधि ), गिरीश ( स्वर संधि), रमेश (स्वर संधि ), तन्मय (व्यंजन संधि ) ।
प्रश्न 5. शुद्ध संधि – रूप बताइए—
(क) यदि + अपि = (1) यदियपि ( 2 ) यद्यपी (3) यद्यपि ।
(ख) उपरि + उक्त = (1) उपर्युक्त (2) उपरोक्त (3) उपरियुक्त ।
उत्तर— (क) (3) यद्यपि/यद्यपि (ख) (1) उपर्युक्त ।