JKBOSE 10th Class Hindi Solutions chapter – 8 क्रिया
JKBOSE 10th Class Hindi Solutions chapter – 8 क्रिया
Jammu & Kashmir State Board JKBOSE 10th Class Hindi Solutions
क्रिया
परिभाषा – जिस शब्द के द्वारा किसी काम का करना पाया जाये अथवा किसी वस्तु के लिए विधान किया जाए उसे ‘क्रिया’ कहा जाता है।
उदाहरण – राम खाता है, यहां ‘खाता है’ क्रिया है ।
सामान्य क्रिया – क्रिया के जिस रूप से काल – विशेष का बोध न हो और उसके अन्त में ‘ना’ का प्रयोग हो उसे क्रिया का सामान्य रूप कहा जाता है। जैसे— आना जाना, सोना, खाना।
धातु – क्रिया के सामान्य रूप से यदि ‘ना’ हटा दिया जाए तो बचे हुए रूप को धातु कहा जाता है जैसे आ, जा, सो, खा।
क्रियाओं के प्रकार
अर्थ की दृष्टि से क्रियाएं दो प्रकार की होती हैं-
1. सकर्मक क्रिया, 2 अकर्मक क्रिया ।
1. सकर्मक क्रिया – जिस क्रिया के व्यापार का फल कर्म पर पड़ता है उसे ‘सकर्मक’ कहा जाता है। जैसे—‘राम खाता है’, यहां क्रिया तो राम कर रहा है, पर उसका फल ‘आम’ पर पड़ रहा है, अतः ‘खाता है’ सकर्मक क्रिया है।
2. अकर्मक क्रिया – जिस क्रिया के फल और व्यापार दोनों कर्ता में रहते हैं उसे ‘अकर्मक’ कहा जाता है। जैसे—’राम सोता है, ‘ यहां ‘सोना’ क्रिया का फल और आपार दोनों कर्ता ‘राम’ पर पड़ रहे हैं, अतः ‘सोना’ अकर्मक क्रिया है।
संयुक्त क्रियाएं – जब कई क्रियाएं मिलकर मुख्य क्रिया के अर्थ को पुष्ट करती हैं तो सहायक क्रियाएं कहलाती हैं। ऐसी मिलीजुली एक से अधिक क्रियाओं को संयुक्त क्रिया कहा जाता है। जैसे-ले जाना, दे जाना, भर देना, पढ़ डालना, गिर पड़ना। यहां ‘आना’, ‘जाना’ आदि मुख्य क्रियाएं हैं उनके साथ ‘ले’, ‘दे’ आदि सहायक क्रियाएं लगी हैं। प्रेरणार्थक क्रियाएं – जब कर्ता स्वयं काम न करके किसी दूसरे को उसे करने की आज्ञा देता है तो वहां ‘प्रेरणार्थक’ क्रिया प्रयुक्त होती है, जैसे-
राम ने खाना खाया
राम ने खाना खिलवाया
नीचे उदाहरण के लिए इस प्रकार की क्रियाओं के रूप दिए जाते हैं-
