JKBOSE 10th Class Hindi Solutions chapter – 15 विराम चिन्ह्न

 JKBOSE 10th Class Hindi Solutions chapter – 15 विराम चिन्ह्न

JKBOSE 10th Class Hindi Solutions chapter – 15 विराम चिन्ह्न

Jammu & Kashmir State Board JKBOSE 10th Class Hindi Solutions

विराम-चिह्न और उनका प्रयोग

विराम-चिह्नों की आवश्यकता :-
‘विराम’ का अर्थ, रुकना, ठहराव, विश्राम । जीवन में भी इस विराम की आवश्यकता का अनुभव किया जाता है। कभी हम तेज़ दौड़ते हैं तो कभी धीरे। कहीं रुकना भी पड़ता है। काम करते-करते थक जाने पर हम भी आराम चाहते हैं। यह आराम ही दूसरे शब्दों में विराम है। लेखन में भी विराम की आवश्यकता है। लेखन का संबंध चिंतन से भी है हम सोचते हैं और लिखते हैं इस सोचने और लिखने के प्रत्यय को किसी-न-किसी विराम चिह्न के द्वारा प्रकट किया जाता है। ऐसा इसलिए भी करना पड़ता है क्योंकि हमारे चिन्तन और कल्पना की धारा सदैव एक जैसी नहीं रहती । विराम चिह्नों के प्रयोग द्वारा इस बात को सरलता से समझा जा सकता है।

हिन्दी भाषा में प्रयुक्त होने वाले मुख्य विराम-चिह्न

1. अल्प विराम—(,) (Comma)
2. अर्द्ध विराम—(;) (Semicolon)
3. पूर्ण विराम—(।) (Full stop)
4. योजक चिह्न—(-) (Hyphen)
5. प्रश्नवाचक चिह्न—(?) (Sign of Interrogation)
6. विस्मयादि बोधक चिह्न—(!) (Sign of Exclamation )
7. उद्धरण अथवा अवतरण चिह्न—(“ ”) (Inverted Comma)
8. कोष्ठक चिह्न–( ), { }, [ ] (Bracket)
9. विवरण चिह्न—(:-) (Colon and dash)

1. अल्प विराम (,)

अल्प विराम का अर्थ है, थोड़ी देर के लिए रुकना या ठहराना । इसका प्रयोग प्राय: दो शब्दों, पदों या वाक्यांशों के बीच होता है।
(क) जब पढ़ने बोलते या लिखते समय अल्प समय के लिए रुकना पड़े वहां इस चिह्न का प्रयोग होता है। उदाहरण के लिए : – राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न ये चारों भाई थे ।
(ख) एक ही प्रकार के वाक्यांश पास-पास लिखे जाएं तो अल्प विराम का प्रयोग होता है। जैसे-
(i) वह रोज़ आता है, पढ़ता है और चला जाता है ।
(ii) महात्मा गांधी, हरिश्चंद्र के समान सत्यवादी, कृष्ण के समान नीतिज्ञ और बुद्ध के समान अहिंसावादी थे।
(ग) आश्रित वाक्यों को अलग करने के लिए भी इस चिह्न का प्रयोग होता है। जैसे – आज मैं काम पर नहीं जाऊंगा, क्योकि मैं अस्वस्थ हूं ।
(घ) सम्बोधन के बाद भी प्रायः इस चिह्न का प्रयोग होता है। जैसे-
(i) सज्जनों, समय आ गया है, सावधान हो जाओ।
(ii) हे राम, रक्षा करो ।
(iii) मोहन, अब तुम स्वतंत्र हो ।
(iv) वीरो, देश तुम्हें पुकार रहा है ।

2. अर्द्ध विराम ( 😉

जहां समान आधार वाले लम्बे वाक्यों को अलग करने की आवश्यकता हो और जहां अल्प विराम की अपेक्षा कुछ अधिक ठहरना पड़े, वहां अद्ध विराम का प्रयोग होता है। जैसे—
(i) प्रधानमन्त्री लुधियाना आए; प्रभावशाली भाषण दिया; जनता की श्रद्धा उमड़ पड़ी।
(ii) चाँद निकला हुआ था; चांदनी छिटकी हुई थी; मैं आकाश की ओर निहार रहा था ।
(iii) छोटे-छोटे बच्चे पानी में घुस जाते हैं ; पानी उछालते हैं; तरंगों से खेलते हैं ।

3. पूर्ण विराम ( । )

पूर्ण विराम का अर्थ है, पूरी तरह रुकना या ठहरना । जहां एक वाक्य अपने पूर्ण अर्थ को प्रकट कर समाप्त हो जाता है, वहां इस चिह्न का प्रयोग होता है। जैसे-
(i) वह गया ।
(ii) तुम जा रहे थे ।
(iii) मैं आज ही देहली से आया हूं।

4. योजक चिह्न (-)

योजक चिह्न प्राय: दो शब्दों को जोड़ता है। इसका सर्वाधिक प्रयोग समस्त पदों में होता है और भी अनेक प्रकार से इस चिह्न का प्रयोग होता है। जैसे–
(i) माता-पिता, घर-द्वार, सीता राम ।
(ii) लेन-देन, रात-दिन, आकाश पाताल, जन्म-मरण ।
(iii) मान-मर्यादा, भोग-विलास, सूझ-बूझ, चमक-दमक, जी-जान
(iv) लूला- लंगड़ा, अंधा-बहरा भूखा- प्यासा ।
(v) आत्मा-परमात्मा, अनाप- सनाप, झूठ-मूठ, पानी-वानी ।
(vi) पढ़ना-लिखना, उठना-बैठना, कहना सुनना, रहना सहना ।
(vii) गली-गली, नगर-नगर शहर-शहर, गांव-गांव, बच्चा बच्चा |
(viii) चलन चलवाना, डराना- डरवाना।
(ix) उड़ना – उड़ाना, गिरना- गिराना ।

5. प्रश्नवाचक चिह्न ( ? )

यह चिह्न प्रश्नवाचक वाक्य के अंत में लगाया जाता है। जैसे-
(i) क्या तुम देहली जाओगे ?
(ii) आप शायद पंजाब के रहने वाले हैं ?
(iii) जहां भ्रष्टाचार का बोलबाला है, वहां ईमानदारी कैसे टिक सकती है ?
(i) प्रश्न का चिह्न ऐसे वाक्यों में नहीं लगाया जाता जिनमें प्रश्न आज्ञा के रूप में हो ।
जैसे – कोलकाता का प्रसिद्ध बाज़ार बताओ ।
(ii) जिन वाक्यों में प्रश्नवाचक शब्दों का अर्थ सम्बन्ध वाचक शब्दों जैसा होता है,
उनमें प्रश्न चिह्न नहीं लगाया जाता है। जैसे-
(i) आपने क्या कहा, सो मैंने नहीं सुना।
(ii) वह नहीं जानता कि मैं क्या चाहता हूँ।

6. विस्मयादि बोधक चिह्न (!)

जहां आश्चर्य, शोक, हर्ष, विस्मय आदि मन के भाव प्रकट हों, वहां इस चिह्न का प्रयोग किया जाता है। जैसे-
(i) अहा ! कितना मनोरम दृश्य है ।
(ii) क्या रे! क्या तूं आंखों से अंधा है ?
(iii) वाह ! तुम्हारे क्या कहने !
बढ़ता हुआ मनोविकार सूचित करने के लिए दो अथवा तीन आश्चर्य चिह्नों का प्रयोग किया जाता है। जैसेशोक ! शोक !! महाशोक !!!

7. उद्धरण चिह्न (“ ”)

(क) जहां किसी पुस्तक का कोई वाक्य या अवतरण ज्यों का त्यों उद्धृत किया जाए, वहां इस चिह्न का प्रयोग होता है।
(ख) पुस्तक, समाचार पत्र, लेखक अथवा कवि का उपनाम, लेख का शीर्षक आदि उद्धृत करते समय भी इकहरे उद्धरण चिन्ह का प्रयोग होता है। जैसे-
(i) ‘कुरुक्षेत्र’ के रचयिता रामधारी सिंह ‘दिनकर’ हैं ।
(ii) ‘इनका सारा शरीर ऐसे लचकता है जैसे अंग्रेज़ी कानून ।’
(iii) प्रस्तुत पंक्तियां ‘टूटते परिवेश’ शीर्षक एकांकी से ली गई हैं।
(iv) ‘पंजाब केसरी’ एक हिन्दी दैनिक पत्र है ।
(v) ‘अधिकार का रक्षक’ एकांकी का सारांश लिखिए।

8. कोष्ठक चिह्न [ ], ( ), { }

वाक्य में आए किसी पद विशेष को भली-भान्ति स्पष्ट करने के लिए कोष्ठकों का प्रयोग होता है।
(i) प्रधानमंत्री ( श्री नरेंद्र मोदी) एक आदर्श नेता हैं ।
(ii) राष्ट्रपिता ( महात्मा गांधी) सत्य और अहिंसा के पुजारी थे।
(iii) धर्मराज ( युधिष्ठिर ) सत्य और धर्म के रक्षक थे।
(iv) इन्द्र ( आनन्द से) अच्छा मैं सफल हो गया ।

9. विवरण चिह्न ( 🙂

किसी पद की व्याख्या करने या किसी के बारे में विस्तार से कुछ कहने के लिए जिस चिह्न का प्रयोग होता विवरण चिह्न कहते हैं। जैसे-
मैं कई बार देहली जा चुका हूं; पाठकों की जानकारी के लिए कुछ विवरण यहां लिख रहा हूं-
पूर्वोक्त चिह्नों के अतिरिक्त नीचे लिखे चिह्नों का भी भाषा – रचना में प्रयोग होता है-
(क) अपूर्णता सूचक ( x x x )
(ख) हंस – पद (^)
(ग) लाघव चिह्न (०) डॉक्टर = डॉ०
(घ) तुल्यता सूचक (=)
(ङ) स्थान पूरक (………..)
(च) समाप्ति सूचक ( —–)

( क ) अपूर्णता सूचक

किसी लेख में जब अनावश्यक अंश छोड़ दिया जाता है तब उसके स्थान पर x x x का प्रयोग किया जाता है।

(ख) हंस-पद

लिखने में जब कोई शब्द भूल से छूट जाता है तब उसे पंक्ति के ऊपर लिख देते हैं । यह चिह्न उसकी पूर्ति का सूचक होता है। जैसे-
कवि में जन्म जात प्रतिभा होती है ।

(ग) लाघव चिह्न

समय की बचत अथवा पुनरुक्ति के निवारण के लिए ।
किसी संज्ञा को संक्षेप में लिखने के निमित्त इस चिह्न का उपयोग करते हैं ।
जैसे – सी० आई०, सी० पी० ।

(घ) तुल्यता-सूचक चिह्न

शब्दार्थ अथवा गणित की तुल्यता सूचित करने के लिए इस चिह्न का प्रयोग किया जाता है; जैसे सुशिक्षित = भलीभान्ति पढ़ा-लिखा । दो और दो = चार ।

(ङ) स्थानपूरक

यह चिह्न सूचियों में खाली स्थान भरने के काम आता है। ‘जूही की कली’ कविता के रचयिता ……….. हैं।

(च) समाप्ति का सूचक चिह्न

इस चिह्न का उपयोग बहुधा लेख अथवा पुस्तक के अन्त में होता है ।
प्रश्न 1. निम्नलिखित गद्यांशों में उपयुक्त विराम-चिह्नों का प्रयोग कीजिए-
(क) कवियों ने इसकी उपमा हीरा मोती माणिक से दी है वह बहुत ठीक है नहीं तो वे अवयव कथित वस्तुओं से भी अधिक मोल के हैं
(ख) साधारणतः सत्य का अर्थ सच बोलना मात्र ही समझा जाता है लेकिन हमने विशाल अर्थ में सत्य शब्द का प्रयोग किया है विचार में वाणी में और आचार में सत्य का होना ही सत्य है
(ग) सत्य की आराधना भक्ति है और भक्ति सिर हथेली पर लेकर चलने का सौदा है अथवा वह हरि का मार्ग है जिसमें कायरता की गुंजाइश नहीं है जिसमें हार नाम की कोई चीज़ है ही नहीं
उत्तर –
(क) कवियों ने इसकी उपमा हीरा, मोती, माणिक से दी है वह बहुत ठीक है; नहीं तो ये अवयव कथित वस्तुओं से भी अधिक मोल के हैं ।
(ख) साधारणत: सत्य का अर्थ सच बोलना मात्र ही समझा जाता है; लेकिन हमने विशाल अर्थ में सत्य शब्द का प्रयोग किया है। विचार में, वाणी में और आचार में सत्य का होना ही सत्य है।
(ग) सत्य की आराधना भक्ति है और भक्ति ‘सिर हथेली पर लेकर चलने का सौदा है’ अथवा वह ‘हरि का मार्ग’ है जिसमें कायरता की गुंजाइश नहीं है, जिसमें हार नाम की कोई चीज़ है ही नहीं।
प्रश्न 2. निम्नलिखित गद्यांशों को उपयुक्त विराम-चिह्न लगाकर लिखिए-
1. उसने कहा तुम्हारे लिए कोई मूल्य नहीं है इस कहानी का पर मेरा तो यही सर्वस्व है
2. हे अमृतपुत्रो मृत्यु का भय मिथ्या है कर्त्तव्य में प्रमाद करना पाप है संकोच और दुविधा अभिशाप है
3. उसने अनुरोध के स्वर में कहा थके मांदे आये कुछ प्रसाद भी नहीं लिया चलो भीतर चलें
4. सवाल के पहले जवाब की उक्ति यदि शब्दश: किसी पर लागू होती है तो बर्नार्ड शॉ पर; क्योंकि जिस किसी ने भी शॉ को व्यंग्य में नीचा दिखाना चाहा उसे खुद ही उनकी हाज़िर जवाबी के कारण शर्मिन्दा होना पड़ा
उत्तर –
1. उसने कहा, “तुम्हारे लिए कोई मूल्य नहीं है इस कहानी का ! पर मेरा तो यही सर्वस्व है।”
2. हे अमृतपुत्रो, मृत्यु का भय मिथ्या है। कर्त्तव्य में प्रमाद करना पाप है। संकोच और दुविधा अभिशाप है।
3. उसने अनुरोध के स्वर में कहा, “थके-मांदे आये। कुछ प्रसाद भी नहीं लिया। चलो, भीतर चलें ।”
4. ‘सवाल के पहले जवाब’ की उक्ति यदि शब्दश: किसी पर लागू होती है तो बर्नार्ड शॉ पर; क्योंकि जिस किसी ने भी शॉ को व्यंग्य में नीचा दिखाना चाहा, उसे खुद ही उनकी हाज़िरजवाबी के कारण शर्मिन्दा होना पड़ा।
प्रश्न 3. नीचे लिखे वाक्यों में उपयुक्त विराम चिह्न लगाइए-
(क) महात्मा गांधी ने गाय को करुणा की कविता क्यों कहा यह उसकी आँखें देखकर ही समझ में आ सकता है
उत्तर –महात्मा गांधी ने “गाय करुणा की कविता है, ” क्यों कहा, यह उसकी आँखें देखकर ही समझ में आ सकता है
(ख) बुजुर्ग की उंगली की सीध में सूखे पेड़ के अन्तराल में एक व्यंजित शिरा जैसे हरी हो आई थी
उत्तर – बुजुर्ग की उंगली की सीध में, सूखे पेड़ के अन्तराल में एक व्यंजित शिरा जैसे हरी हो आई थी।
(ग) पर एक बात कहूँ मानोगे जानकार ने पूछा
उत्तर – ” पर एक बात कहूं? मानोगे?” जानकार ने पूछा।
(घ) वल्लरी सूखी नहीं, मात्र उस वृक्ष से हट गई
उत्तर – वल्लरी सूखी नहीं, मात्र उस वृक्ष से हट गई ।
(ङ) जो छात्र परिश्रम करता है वह जीवन में उन्नति करता है
उत्तर – जो छात्र परिश्रम करता है, वह जीवन में उन्नति करता है।
(च) पेड़ को मत देखो, देखो केवल मछली की आँख देखो जो तुम्हारे लक्ष्य का केन्द्र बिन्दु है
उत्तर – पेड़ को मत देखो, देखो केवल मछली की आँख देखो, जो तुम्हारे लक्ष्य का केन्द्र बिन्दु है।
(छ) नेता जी ने कहा तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा
उत्तर – नेता जी ने कहा, “तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा ।”
(ज) सभी त्यौहार होली दीवाली ईद क्रिसमस मिलकर मनाओ
उत्तर – सभी त्यौहार होली, दीवाली, ईद, क्रिसमस मिलकर मनाओ ।
(झ) संसार के सारे जीव ईश्वर की संतान हैं जाति-पाति और छुआछूत व्यर्थ है न कोई हिन्दू है और न कोई मुसलमान है न कोई ब्राह्मण है और न कोई अछूत सब मनुष्य हैं
उत्तर – संसार के सारे जीव ईश्वर की संतान है। जाति-पाति और छुआछूत व्यर्थ है। न कोई हिन्दू है और न कोई मुसलमान है, न कोई ब्राह्मण है और न कोई अछूत- सब मनुष्य हैं।
(ञ) आज के युग में कौन ऐसा है जो रोना और धोना खाना-पीना और ओढ़ना नहीं जानता।
उत्तर – आज के युग में कौन ऐसा है जो रोना और धोना, खाना-पीना और ओढ़ना नहीं जानता ?
(ट) बूढ़े ने कहा अरे मैं तीस मील से पैदल चल कर आ रहा हूँ
उत्तर – बूढ़े ने कहा, “अरे ! मैं तीस मील से पैदल चल कर आ रहा हूँ।”
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