JKBOSE 10th Class Hindi Solutions chapter – 16 उपसर्ग
JKBOSE 10th Class Hindi Solutions chapter – 16 उपसर्ग
Jammu & Kashmir State Board JKBOSE 10th Class Hindi Solutions
उपसर्ग
परिभाषा – उपसर्ग उस शब्दांश अथवा अव्यय को कहते हैं जो किसी शब्दांश अथवा अव्यय धातु के साथ मिलकर विशेष अर्थ प्रकट करता है। उपसर्गों का कोई स्वतन्त्र अस्तित्व नहीं होता फिर भी वे अन्य शब्दों के साथ मिलकर एक विशेष अर्थ को प्रकट करते हैं। उपसर्ग हमेशा शब्द के आदि में लगते हैं। जैसे अन उपसर्ग को जान शब्द के पहले लगा देने से एक नया शब्द अनजान बन जाता है। कभी-कभी उपसर्ग लगाने से शब्द में कोई विशेष अन्तर नहीं आता। उसका अर्थ प्रायः ज्यों का त्यों बना रहता है । भ्रमण से पहले परि उपसर्ग लगाने से परिभ्रमण शब्द बनता है पर भ्रमण और परिभ्रमण के अर्थ में कोई अन्तर नहीं । कभी-कभी उपसर्ग लगाने से अर्थ में विपरीतता आ जाती है ।
ऊपर के संक्षिप्त विवेचन से यह निष्कर्ष निकलता है-
(क) उपसर्ग के प्रयोग से शब्द के अर्थ में नवीनता आ जाती है ।
(ख) उपसर्ग के प्रयोग से पहले शब्द के अर्थ में कोई अन्तर नहीं आता ।
(ग) उपसर्ग के प्रयोग से शब्द के अर्थ में विपरीतता आ जाती है।
उपसर्ग लगाने से ही शब्द के अनेक अर्थ हो जाते हैं। देखिए –

हिन्दी में जो उपसर्ग मिलते हैं वे संस्कृत, हिन्दू, उर्दू और अंग्रेज़ी भाषा के हैं, में प्रयुक्त होने वाले उपसर्गों की संख्या इस प्रकार है-
(i) संस्कृत के उपसर्ग = 22
(ii) हिन्दी के उपसर्गों की तरह प्रयुक्त होने वाले संस्कृत के शब्द = 29
(iii) हिन्दी के उपसर्ग = 15
(iv) उर्दू के उपसर्ग = 19
(v) अंग्रेज़ी के उपसर्ग = 5



संस्कृत में कभी-कभी एक से अधिक उपसर्गों का प्रयोग भी होता है; जैसे-
निर् + अप् + राध = निरपराध |
वि + आ + करण = व्याकरण |
सम + आ + लोचना = समालोचना |
सु + वि + ख्यात = सुविख्यात ।